कविता

हार

हर दौड़ में
सबसे आगे ही रहूं
मैं ही जीतू
मैं ही कामयाब होऊं
आखिर कब तक
कभी तो हारना होगा
हारना सीखना होगा
नहीं तो अभिमान हो जाएगा
आपका अभिमान
तोड़ देगा आपको एक दिन
जब हार जाएंगे कोई दौड़
हो सकता है हार भूलने को
नशे का दामन थाम लें
नींद की गोलियों को खा
जीवन अपना अंत कर लें
या फिर अपने ही हथियार से
कर लें आत्म हत्या
इसलिए जरूरी है
हारना भी
*ब्रजेश*