कविता

दिल के करीब ओके

समय
चलती रहती है,
दोस्त
बनते रहते हैं
कुछ दिल के
करीब
और कुछ दिल से
दूर
इन नाजुक
रिश्तों को सलाम
जो होते है पराये
लेकिन
बिछड़ने के बाद
अपनों से जयादा
दर्द की चुभन देते है
आँसुओं के रूप में,
यादों के रूप में
और बहती
हवाओं के
रूप में
अलौकिक पर्व की
हार्दिक  शुभकामनाएं
शुभ संध्या सर
ओके !