कविता

मातृभूमि को नमन

बेड़ियां सब तोड़कर
स्वप्न पराधीन छोड़कर
कर फतह हर एक किला
तू बांध ले सर पर कफन
जो शहीद हुआ किसी समर
नाम गूंजेगा होकर अमर
अन्याय अब बस बहुत हुआ
कर चुके अब बहुत सहन
कोई वीरता ना व्यर्थ हो
राष्ट्र रक्षा में तू समर्थ हो
हे वीर! ना हो वीरगति
हर कवच तुझ को हो वहन
तू कर विजय, बन रणविजय
रहे स्मरण दिन पल समय
हुंकार भर कर सिंह की
कर मातृभूमि को नमन
— प्रियंका अग्निहोत्री “गीत”