कविता

अपराधबोध

‘पति’ शब्द से
अहंकारबोध होता है,
चाहे करोड़पति हो,
लखपति हो,
निशा पति हो,
उमा पति हो,
कोई आपत्ति हो
या राष्ट्रपति ही
क्यों ना हो?
तुम्हारे प्यार में मैं
वापस भी आया,
तो क्या गारंटी है,
तुम फिर से मुझे
धोखा नहीं दोगी ?
किसी पर विश्वास
इतना अधिक करो
कि वह तुमसे
छल करते वक्त
स्वयं को दोषी
अवश्य  समझे !
हम न अमेरिका हैं,
न अम्बानी !
नियोजित ‘बिहारी’
भारतीय हैं !
महिलाएँ गैर-मर्दों को
चूना क्यों लगाती हैं,
कोई बताएँगे ?
जहर से भी
जहरीला खाना
‘धोखा’ है !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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