मुक्तक/दोहा

मुदित हुई उजियार

छुई मुई सी फुलझड़ी ,जब करती है शोर,
हो जाते हैं फुस्स तब ,ये बम आदमखोर।

शोख फुलझड़ी कर गई ,रंगों की बौछार,
चटख पटाखे कर रहे ,शोर धमाधम यार।

फव्वारों कि रोशनी,खुश कर गए अनार ,
चकरी नाचे झूम के,मुदित हुई उजियार।

दीप जल्द ही बुझ गया,निर्धन जन के द्वार .
महँगाई से हार का ,कौन करे उपचार ?

हँसते हँसते दीप जी.करें तिमिर को मात,
फुलझड़ियाँ रोशन करें,दीवाली की रात।

— महेंद्र कुमार वर्मा

महेंद्र कुमार वर्मा

द्वारा जतिन वर्मा E 1---1103 रोहन अभिलाषा लोहेगांव ,वाघोली रोड ,वाघोली वाघेश्वरी मंदिर के पास पुणे [महाराष्ट्र] पिन --412207 मोबाइल नंबर --9893836328