कहानी

कहानी – जहाँ चाह वहाँ राह

मोहिनी सरकारी विद्यालय में कक्षा 4 की स्टूडेंट थी। वह अपने भाई को अच्छे कपड़े पहन कर  प्राइवेट स्कूल जाते हुए देखा करती थी। उसका मन भी भाई के साथ पढ़ने जाने का हुआ करता था।प्रतिदिन उसकी  माँ उसके  भाई को अच्छी तरह तैयार करके गांव की पुलिया के पास पहुँच जाती थी ।स्कूल की बस वहीं से मिला करती थी। उसे बस में जाने का बड़ा शौक था।
 एक दिन उसने अपने मन की बात अपनी मम्मी से कह दी कि उसका नाम भी उसी स्कूल में लिखवा दो।मम्मी बोली-“तुझे तो पराये घर जाना है।अगर तुझे स्कूल भेज दिया तो तेरी छोटी बहन नन्ही बिटिया की  कौन देख रेख करेगा।?और तेरा नाम सरकारी विद्यालय में तो लिखा है। मेरे काम पर ना जाने की दशा में तू सरकारी स्कूल जाया कर। सरकारी स्कूल में एक मैडम ही तो है वह अकेले क्या क्या और किसको किसको पढ़ालेगी?
कुछ दिन बाद मोहिनी की सहेली  नव्या आई और बोली की अपने स्कूल में दो मास्टर और आये है।अब स्कूल आया करो। मोहिनी ने अपनी व्यथा उसको सुना दी नव्या सुनकर चली गयी।
 हेडमास्टर ने अभिभावकों  की एक मीटिंग बुलाई और कहा”अब तक मैडम अकेले इस विद्यालय को देख रही थी  लेकिन अब हम और राकेश जी और मैडम सहित तीन लोग हो गए है।अपने बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय में भेजिए। हम आपके बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने  की कोशिश करेगे और किसी ने कहा है कि कोशिश करने वालों की कही हार नही होती है या तो सीख मिलती है या जीत मिलती है।”
सभी अभिभावकों ने अपने बच्चों को भेजने का वायदा किया।” अगलेदिन उपस्थित  फिर भी कम ।
हेडमास्टर ने सरला मैडम से पिछले साल और वर्तमान साल के उपस्थित रजिस्टर लाने को कहा और बोले” मैडम ऐसे बच्चों की सूची बनाये जो इस सत्र और पिछले सत्र में कम आये है।और कम आने का क्या कारण है?” सरला मैडम ने कहा”सर जी इस गांव में मजदूर वर्ग ज्यादा है।परिवार के सभी सदस्य दिहाड़ी पर चले जाते है। उनके छोटे बच्चों को यही बच्चे देखरेख करते हैजो विद्यालय कम आते है।”
 हेडमास्टर ने कहा”तो क्या हमारे विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति ऐसे ही रहेगी। मैडम”बोली- बिलकुल” राकेश ने अपनी बात रखी”सर हर विद्यालय की यही कहानी है । हेडमास्टर ने कहा”हमे हर हाल में बच्चों की उपस्थिति बढ़ानी है।इसके लिए हमे व्यवस्था में परिवर्तन करना पड़ेगा ।”
अगले दिन हेडमास्टर आधा घंटे पहले ही विद्यालय में आ गए।और अनुपस्थिति वाले बच्चों में से पांच बच्चे के घर पर गए। उन्होंने कारण भी वो ही पाया जो मैडम ने बताया था। तब तक विद्यालय का समय हो गया था ।सभी बच्चों को एक साथ एकत्रित करके कक्षा वार दौड़ करा दी इस दौड़ के संपादित होने के दौरान सरला मैडम और राकेश भी आ गए। सभी स्थान प्राप्त बच्चों को पुरुस्कार के रूप में प्रधानाध्यापक  एक एक पेन दिया ।सभी बच्चे बहुत खुश हुए। ठंड के दिनों में बच्चों को यह अभ्यास अच्छा लगा। नए सर के साथ बच्चों को अच्छा लग रहा था।
धीरे -धीरे  बच्चों द्वारा अनुपस्थिति रहने वाले बच्चों तक  नए सर के क्रियाकलाप पहुँचने लगे।अब बच्चों की उपस्थिति धीरे धीरे बढ़ रही थी।मोहिनी  का मन भी स्कूल जाने को करने लगा।
 हेडमास्टर ने  प्रतिदिन5बच्चों के घर मे जाना जारी रखा। इसी के क्रम में मोहनी के घर भी गए। सौभाग्य से मोहनी के माता पिता भी मिल गए।हेडमास्टर ने कहा -“आपकी बच्ची स्कूल कम आती  है।”उन्होंने मोहिनी को बुलाकर कई सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे। सभी प्रश्नो के जबाब मोहिनी ने बिल्कुल सही दिए।हेडमास्टर ने कहा-“आपकी बच्ची तो बहुत होशियार है। पता चला है कि आपका बच्चा प्राईवेट स्कूल में जाता है। मैं यह वादा करता हूं कि अगर आप मोहिनी को स्कूल भेजते   है तो मोहनी अपने भाई से ज्यादा होशियार हो जाएगी,।””मोहनी के पिता ने स्कूल भेजने की बात कही।
अब उपस्थित बढ़ रही थी ।सातवां कालांश हैडमास्टर का था।उन्होंने सभी बच्चों को मैदान में आने को कहा।इस पर राकेश बोले”सर जी गणित की कक्षा  मैदान में क्यों?”हेडमास्टर ने कहा कि  हर एक विषय को कहीं भी पढ़ाया जा सकता है।सम विषम की अवधरणा को समझाने के लिये सभी  बच्चों से कहा आज बच्चों एक खेल खिलाएंगे। बोलो कौन सा खेल खेलोगे?।सभी बच्चों ने अपनी मनपसंद टीम बनाकर कहा कबड्डी।  हैडमास्टर ने कहा–“ऐसे टीम नही बनेगी। टीम मेरे हिसाब से बनेगी। सभी बच्चों को एक लाइन में खड़ा कर के कहा पहला बच्चा विषम दूसरा सम तीसरा विषम इस प्रकार पूरी लाइन में खड़े बच्चों को सम विषम में बांट दियाअब प्रत्येक बच्चे को मालूम हो चुका था कि कौन सम है और कौन विषम।तभी हैडमास्टर ने आदेश दिया सम एक कदम आगे प्राचल। फिर क्या था पूरे बच्चे  दो टीम में विभाजित हो चुके थे।और फिर कबड्डी  खिलाई गई।इस खेल से  बच्चे खेल खेल में सम विषम को समझ चुके थे।
अब हर दिन हेडमास्टर खेल खेल में पढ़ाने लगे।उन्हें अपने स्टाफ का भी सहयोग मिलने लगा। मोहनी भी यदा कदा स्कूल आने लगी ।हेडमास्टर ने अपने स्टाफ़ में चर्चा की-“अब बच्चो के उपस्थित ठीक चल रही है।अगर हमें और उपस्थित बढ़ानी है तो अपने विषय मे रोचक क्रिया कलाप भी शामिल  करने होंगे।”स्टाफ-ने कहा “सर आपके क्रियाकलापों को देखकर हमारे अंदर भी ऊर्जा का संचार हो गया है।अब हम हर एक पाठ को क्रियाकलापों के द्वारा पढ़ाएंगे।”
हेडमास्टर–“वो तो ठीक है पर अभी भी कुछ बालिकाएं जैसे मोहनी स्कूल कम आ रहीं है। ऐसा करते है कि इन बच्चों के माता पिता की एक मीटिंग बुलाते है।”अगले दिन मोहनी सहित कइयों के माता पिता स्कूल पहुच चके थे। हेडमास्टर- ने कहा -“(मोहनी के मां की ओर देखते हुए)आपने तो मोहनी को डेली स्कूल भेजने का वादा किया था।?)मोहनी की मां–“सर जी हम सब काम पर चले जाते है घर मे छोटे बच्चों की देखभाल तो यही करती है।फिर पढ़लिखकर ये क्या करेगी ।?ससुराल में चूल्हा चौका ही तो संभालना है। “
हेडमास्टर–“बहुत गंदी सोच है ।अगर एक लडक़ी पढ़ती है। शिक्षित होती है तो पूरा समाज, पूरा परिवार शिक्षित होता है।  अगर आपकी लड़की अनपढ़ रह जायेगी तो जीवन के हर राह पर कांटे है।”
सभी लोगों ने वायदा किया कि अब हम डेली बच्चियों को भेजेंगे।
फिर क्या था स्कूल का माहौल बिल्कुल बदल गया था। प्राईवेट स्कूल जाने वाले बच्चे भी सरकारी स्कूल में आ चुके थे। मोहनी ,नंदनी ,नव्या, नवरत्न पीयूष ,और गोपी ने लर्निंग ऑउट कम परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किये।  5क्लास पास करके मोहिनी ,नंदनी ,और भव्या ने जवाहर नवोदय स्कूल की प्रवेश प्रक्रिया में अच्छे अंक प्राप्त किये और नवोदय विद्यालय में एडमिशन ले लिया ।

परिचय - डॉ. कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव

पिता का नाम-श्री बनवारी लाल श्रीवास्तव शिक्षा -एमएससी ,बीएड, पीएचडी लेखन विधा- कैरियर आलेख ,बाल साहित्य सम्प्रति- शासकीय शिक्षक अन्य -स्तरीय पत्र पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशन राव गंज कालपी ,जालौन उत्तर प्रदेश पिन 285204 मोबाइल नंबर9451318138 ईमेल om_saksham@rediffmail.com

One thought on “कहानी – जहाँ चाह वहाँ राह

  1. कहानी के माध्यम से गरीब विद्यार्थियों के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय को एक आदर्श के रूप में दिखाकर जवाहर नवोदय विद्यालय के उद्देश्य को स्पष्ट करने में पूर्ण सफ़लता मिली है}

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