क्षणिका

क्षणिका

तू बन जा मेरी कविता
मै बन जाऊँ तेरी कहानी
तेरी आँखों में बस जाऊँ
तू देखे इन्द्रधनुष के रंग रूहानी
अमर प्रेम की बाते किसे बतानी
दुनिया के कुछ लोग मतलबी
प्रेम की परिभाषाउन्हें होगी पढ़ानी।
— संजय वर्मा “दॄष्टि”

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