भाषा-साहित्य

अयोध्यावाले

माँ जीवन शैफाली की कविता, यथा-
“मैं तुम्हारी अयोध्या हूँ
श्रीराम !
सीता के राम
अहिल्या के राम
कौशल्या के राम
कैकयी के राम
सुमित्रा के राम
शबरी के राम
दशरथ के राम
भरत के राम
लक्ष्मण के राम
हनुमान के राम
विभीषण के राम
विश्वामित्र के राम
और रावण के भी राम
राम तो सबके हैं,
रहेंगे भी !
किन्तु अयोध्या !
वो अयोध्या तो केवल राम की है
मैंने तुम्हें जन्म नहीं दिया,
फिर भी तुम्हारी जन्मभूमि हूँ
मुझसे तुम्हें वनवास मिला
फिर भी दीपावली मैंने ही मनाई !
जो तुम्हें जपेगा, वो तुम्हारा ही होगा,
तुम जगत के हो-
और जगत के ही कहलाओगे !
तुम सबके हो राम !
लेकिन मैं….
मैं तो सिर्फ
तुम्हारी अयोध्या हूँ राम !”

अयोध्या के कुम्हारों की बेटियों ने मुफ़्त में दिए 5,50001 दीये। दीपकों की संख्या 5 लाख 50 हजार 1 है, जो कि एक विश्व रिकॉर्ड है और इतनी बड़ी संख्या में एक साथ दीपक जलाने का कार्यक्रम आज तक पूरी दुनिया में कहीं आयोजित नहीं हुआ था।

ध्यातव्य है, अयोध्या के कुम्हार कन्याओं ने मिट्टी के इन दीपकों की निर्माण की थी और 5,50,001 मिट्टी के दीपकों को दान में दी थी । यह एक विश्व रिकॉर्ड है, इसे ‘गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने अपने वेबसाइट में जगह दी है। सभी कुम्हार कन्याओं को एतदर्थ शुभमंगलकामनाएँ।

….और पारिवारिक जीवन में यह भी-
“इश्क़ की आँखें नहीं होती,
सिर्फ़ दिल होती है !
पत्नी सुंदर नहीं,
समझदार होनी चाहिए !
अगर स्त्री होना सरल नहीं,
तो पुरुष होना भी
आसान नहीं !
दरम्यान-ए-इश्क
उनकी आँखें सूजी रही;
कि टपक रहे हैं आँसू,
शादी के बाद भी !”

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