कविता

जिंदगी

सोचा है कि अब
न किसी का दिल दुखाया जाएं
न किसी पर हक जताया जाएं
बची है जिंदगी
जो पल दो पल
खामोश रहकर
गुजार दी जाएं
बहुत जी लिए शोर शराबे में
अब चंद दिन बिना शोर शराबे के
जी लिया जाए