बाल कविता

बालगीत – दूल्हा आया

दूल्हा आया ! दूल्हा आया!!
सँग में बहुत बराती लाया।।

घोड़ी पर दुलहा बैठा है।
तना हुआ कुछ-कुछ ऐंठा है।।
हँसता मुस्काता – सा पाया।
दूल्हा आया ! दूल्हा आया!!

बैंड बज रहा आगे – आगे।
सभी देखने को हम भागे।।
चाची, भाभी के मन भाया।
दूल्हा आया ! दूल्हा आया!!

पीछे उसके सजे बराती।
नाच रहीं बाला मदमाती।।
लड़कों ने भी नाच दिखाया।
दूल्हा आया ! दूल्हा आया!!

सजे हुए घर, द्वारे, गलियाँ।
सुंदर वंदनवार फुलड़ियाँ।।
जिसने देखा वह हर्षाया।
दूल्हा आया ! दूल्हा आया!!

आज रात में होगी शादी।
करें पुरोहित ब्याह मुनादी।।
‘शुभम’ जहाँ मंडप बनवाया।
दूल्हा आया ! दूल्हा आया!!

— डॉ. भगवत स्वरूप ‘शुभम’