लघुकथा

धुंधलाहट

दिनेश ने अपनी गुड़िया-सी प्यारी बेटी हर्षिता को खो दिया था. हर्षिता नहीं रही, लेकिन उसकी हर्षमई बातों को दिनेश कैसे भुला सकता था!

”पापा, इस बार हम इको फ्रैंडली दिवाली मनाएंगे.” हर्षिता ने स्कूल से आते ही कहा था.

”कुछ खास बात!” आश्चर्यचकित थे दिनेश जी. कल तक ढेर सारे पटाखे लाने के निहोरे करती बेटी आज इको फ्रैंडली दिवाली मनाने की बात कर रही है!

”टीचर ने कहा है पापा, पटाखे जलाने से कभी-कभी हाथ जल सकता है, आग भी लग सकती है, लेकिन सबसे बड़ी बात प्रदूषण बढ़ने का खतरा है, जिससे सब लोग और विशेषकर बच्चे सांस लेने में परेशानी मह्सूस करने के साथ अनेक बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं.” हर्षिता ने कहा था.

मैंने ही उसको शब्दजाल में फंसाया था.

”हमें भी स्कूल में ऐसा ही कहा जाता था. पटाखे न जलाने के कितने वादे किए थे हमने!”

”सच्ची पापा!” हर्षिता ने आश्चर्य चकित होकर कहा था.

”लेकिन किसी ने भी पटाखे जलाने से परहेज नहीं की. चलो हम न भी जलाएं, तो बाकी लोग तो जलाएंगे, प्रदूषण से तो हम फिर भी बच नहीं पाएंगे. इस साल तो जला लेते हैं, अगले साल से पक्का इको फ्रैंडली दिवाली!” और मैंने लाए हुए ढेर सारे पटाखे उसके सामने रख दिए.

”दिवाली की गहमागहमी में मिठाई और उपहार बांटने को सरपट दौड़ती हुई अनगिनत गाड़ियों ने और पराली के खतरनाक धुएं के साथ पटाखों के जहरीले मिश्रण ने वातावरण को इतना धुंधमय कर दिया था कि हाथ-को-हाथ नहीं सूझ रहा था.

पर्यावरण की धुंधलाहट तो फिर भी ठीक हो जाएगी, लेकिन शब्दजाल की धुंधलाहट का क्या?” सांस न ले पाने की परेशानी के कारण गई हर्षिता की फोटो हाथ में लेकर दिनेश जी अश्रुधार को नहीं रोक सके.

परिचय - *लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “धुंधलाहट

  1. पर्यावरण है या आफत! एक घंटे प्रदूषण के बीच बाइक चलाई, इमरजेंसी में भर्ती होने की आई नौबत; हालत देख डॉक्टर हैरान—पिछले दिनों जब दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर चला गया था। उस दिन 29 साल का एक युवक अपने घर से बाइक पर निकला। एक घंटे तक उसने दिल्ली की जहरीली हवा में बाइक चलाई। इस दौरान उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। सांस लेने के लिए जोर लगाना पड़ा। छाती में जकड़न होने लगी। वह आनन फानन में मणिपाल अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचा। डॉक्टर ने जब जांच की तो पता चला कि युवक को प्रदूषण की वजह से ये दिक्कतें हो रही हैं। जबकि वह सिगरेट तक नहीं पीता है, तब भी गले पड़ गई पर्यावरण की आफत!

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