स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ – कारण एवं रोकथाम के उपाय

क्या है मानसिक स्वास्थ्य–
 आधुनिक युग की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य अत्यधिक प्रभावित होता है। ‘अवसाद’ मानसिक रोग का सबसे साधारण प्रकार है, जिसे अंग्रेजी में ‘डिप्रेशन’ कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को भूलने की बीमारी हो जाती है। हम सभी के लिए सभी बातों को याद रखना काफी मुश्किल होता है। रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत नुकसान पहुंचाने वाला मानसिक विकार अवसाद है। जिसमें हमेशा मन उदास रहता है, या किसी भी गतिविधि में मन नहीं लगता है।
इसका ही दूसरा रूप दुश्चिंता है।यह एक ऐसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जिसमें बहुत ज्यादा चिंता, बेचैनी या डर की वजह से व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के कार्य करने में कठिनाई होती है।
 मानसिक अस्वस्थ व्यक्ति द्विध्रुवी विकार से पीड़ित हो जाता है ।इस विकार में मिजाज बदलता रहता है। जिसमें बहुत ज्यादा अवसाद से घिर जाना या अत्यधिक उन्मादी हो जाना शामिल है।
 मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण—
 मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कारण निम्नलिखित हैं-
1. पारिवारिक समस्याएं –
कुछ लोगों के घर में अनेक तरह की समस्या होती है, जैसे गरीबी, अशांति, पारिवारिक झगड़े, धन की कमी आदि। ऐसे लोग हर छोटी -छोटी बात पर भी अधिक विचार करने लगते हैं। और उसके पीछे के कारण को खोजने के चक्कर में खुद को एक गंभीर बीमारी का रोगी बना लेते हैं।
 2.अकेलापन —
अकेलापन व्यक्ति के जीवन में बहुत गलत प्रभाव डालता है ।आजकल युवा वर्ग में यह कारण अधिक पाया जाता है। जब उनका प्रेमी या प्रेमिका उनके साथ धोखा कर देता है, तो वह खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं ।
3.असाध्य रोग–
 मानसिक कमजोरी के साथ-साथ कुछ लोग अपनी शारीरिक कमजोरी और रोगों के कारण भी अधिक चिंतित रहने लगते हैं। धीरे-धीरे उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। और यह परेशानी ही उनके अवसाद का कारण बन जाती है।
 4. अनुवांशिक–
 डिप्रेशन अनुवांशिक भी है।अगर आपके माता-पिता आपके जन्म से पूर्व अधिक चिंतित रहते थे। अथवा उनका मानसिक स्वास्थ्य खराब था।गर्भावस्था के दौरान माँ मानसिक रूप से अस्वस्थ रही है ,तो बालक में भी मानसिक विकार उत्पन्न होने की पूर्ण संभावना रहती है।
5.बेरोजगारी —
ऐसे बहुत से युवा हैं जो परिश्रमी और योग्य होते हुए भी बेरोजगार हैं। इस सबसे प्रभावित होकर वह अवसाद के शिकार हो जाते हैं। कभी कभी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पाने के कारण युवक आत्महत्या जैसे अपराध भी कर बैठते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ और शक्तिशाली बनाने के उपाय—
 1. योग तथा व्यायाम –
किसी ने कहा है कि “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है”। इसलिए व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए योग करना अत्यंत आवश्यक है। योग से असाध्य बीमारियों से भी छुटकारा पाया जा सकता है ।
कहा जाता है ‘करो योग, रहो निरोग’ इसलिए हमें 20 से 30 मिनट प्रतिदिन योगाभ्यास, ध्यान क्रियाएं, आसन आदि करने चाहिये।
 2. संतुलित आहार–
संतुलित और पौष्टिक आहार लें। फल, सब्जी, मांस, फलियां और कार्बोहाइड्रेट आदि संतुलित आहार लेने से मन प्रसन्न रहता है। संतुलित आहार से न केवल अच्छा शरीर बनता है, बल्कि यह दुखी मन को भी शांत करता है। तभी कहा गया है “जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन”।
3. बातचीत करें —
हमें अपने विचारों को …अपने दुखों को… दूसरे व्यक्तियों से साझा कर लेना चाहिए ।साझा करने से सदैव ही प्रसन्नता में वृद्धि और दुखों में ह्रास होता है।
 इसलिए अपनी बात मन में न रखें, बल्कि उसे बातचीत के माध्यम से अपने मित्रों के साथ शेयर करें ।
 4.अच्छे दोस्त बनाएं —
अच्छे दोस्त आपको आवश्यक सहानुभूति प्रदान करते हैं। साथ ही साथ अवसाद के समय आपको सही सलाह भी देते हैं।कहते हैं कि ” एक मित्र सौ रिश्तेदारों से बेहतर होता है।”
  5 . टहलने जाएं–
 यदि  आधा घंटा सुबह और आधा घण्टा शाम को टहलने जाते हैं, तो व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य  सही रहता है। हमारा शरीर और पाचन क्रिया सही रहती है ।वहीं हम मानसिक रूप से भी प्रसन्न रहते हैं।
6.अपने लिए समय निकालें–
 आज की व्यस्त जीवनशैली में प्रत्येक व्यक्ति के पास समय का अभाव है ।हम अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है हमें अपने लिए समय निकलना चाहिए।
7.मधुर संगीत सुनें —
आधुनिक युग में अवसाद को दूर करने का एक बेहतरीन विकल्प मनचाहा संगीत सुनना है। संगीत की सरगम में डूबकर दुखों का भार को कम किया जा सकता है। संगीत जख़्मी हृदय पर स्नेह लेप का कार्य करता है।
8.डायरी लिखें–
 अपने मन के दर्द को कागज़ पर उकेरकर भी हम मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित होने से बचा सकते हैं। लेखन को अपने पसंदीदा कार्यों में सम्मिलित करके तनाव जैसे भयावह रोग से बचाव किया जा सकता है। अंत में चंद पंक्तियाँ आशा का संचार करने के लिए युवा वर्ग को समर्पित करती हूँ—
पथिक हारना नहीं जीवन संघर्ष में,
नवीन अनुभव प्राप्त होंगे,पुनः इस वर्ष में।
प्रयासों की राह कभी न तजना साथी,
तेरा उद्देश्य ही बनेगा,तेरा सजना साथी,
व्यवहार सम रखना विषाद और हर्ष में,
पथिक हारना नहीं जीवन संघर्ष में।
कर्त्तव्य की भट्टी में कर आलस्य का दमन,
जीवन में कभी है उत्थान, कभी पतन,
अवरोध न आने पाये,सद्गुणों के उत्कर्ष में।
पथिक हारना नहीं जीवन संघर्ष में।
आशाओं का दीप अनवरत जले हृदय में,
निराशा का आगमन न हो  उर के निलय में,
मलिन न होने पाये मानवता, मूल्यों के अपकर्ष में।
पथिक हारना नहीं जीवन संघर्ष में।
अदम्य साहस का परिचय दो कर्म पथ पर,
सुशोभित हो तेरा शौर्य, जीवन रथ पर,
सदन बना लो सफलताओं के अर्श में।
पथिक हारना नहीं जीवन संघर्ष में।
— प्रीति चौधरी “मनोरमा”

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