कविता

माँ तेरी ऑचल

माँ तेरी ऑचल में है शीतल छाया
माँ तेरी आँचल में है ममता व माया
माँ तेरी चरणों में है     गंगाधाम
जय जय मईया तुम्हें उदय का प्रणाम

माँ तेरी ऑचल में है करूणा की साया
माँ तेरी ऑचल में मैं वात्सल्य है पाया
माँ तेरी चरणों में है दर्शन की चारों धाम
जय जय मईया तुम्हें उदय का प्रणाम

माँ तेरी आँचल में मैं बचपन है पाया
माँ तेरी ऑचल में मेरी पला ये काया
माँ तेरी चरणों में है जग का सुरधाम
जय जय मईया तुम्हें उदय का प्रणाम

माँ तेरी आँचल में है सब कुछ पाया
माँ तेरी आँचल में मैंने तालीम है पाया
माँ तेरी चरणों में है पावन गुरूधाम
जय जय मईया तुम्हें उदय का प्रणाम

माँ तेरी आँचल को मैं शीश नवाया
माँ तेरी आँचल में मैंने जन्नत है पाया
माँ तेरी चरणों में है धरा का सुखधाम
जय जय मईया तुम्हें उदय का प्रणाम

— उदय किशोर साह