लघुकथा

मनाकर्षण

“मन चंचल है अगर इसे रोक भी लिया जाय, परंतु तन ‘आकर्षण’ के पीछे बावरी है इसे कैसे रोकेंगे ?”
-एक मित्र का एक यक्ष प्रश्न !

“मन चंचल होनी ही चाहिए,
तो वहीं आकर्षण मानवीय जीवन की प्रकृति है !”
-दूजे मित्र से प्राप्त दक्ष उत्तर।