कविता

लघुत्तम बीज

जब मैं जड़ था
तो चेतनलोग
मुझ पर बरस गए !
अब जब चेतन हुआ
तो वे सब जड़ हो गए !

अकेला चना भी
अंकुरित होता है,
जो कालांतर में
पौधा का रूप धर
इतने चने
पैदा कर सकते हैं
कि भांड़ फूट जाय !

आप यादों में
याद आते हैं,
आप ज़ज़्बातों में
ज़ज़्बात होते हैं;
पर जब
रिश्ते की बात आए,
तो ‘सिफ़र’ हो जाते हैं !

नाखुशी या बेरुखी
बड़े लोग होते हैं,
हम ‘लघुत्तम’ की
क्या औकात ?

धन हमेशा के लिए
मित्र नहीं होते,
पर मित्र
हमेशा के लिए
धन जरूर होते हैं !

कुछ लोग
चट्टान पर ही चढ़ ले,
तो अपनी ख्याति के लिए
कह दे-
कि उसने
एवरेस्ट छू लिया है !