हास्य व्यंग्य

व्यंग लेख – नेता पुत्रों का राजनीतिकरण

बचपन में किसी क्लास में पढ़ा था ” पढ़ लिख कर मैं एक किसान बनूंगा ” शायद तब देश में लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे । उनका नारा ” जय जवान जय किसान ” का उस पर असर रहा होगा । गांव चौपालों में भी यह बात खूब कही जाती थी कि किसान का बेटा किसान ही बनेगा और डॉक्टर का बेटा डॉक्टर पर मास्टर का बेटा मास्टर ही बनेगा यह कोई नहीं कहता था ।
डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन सकता है बस उसे नस में सूई लगाना आ जानी चाहिए, परन्तु मास्टर का बेटा मास्टर बने उसके लिए उसे खूब पढ़ना पड़ेगा पर बेटा पढ़ने की बजाय उसका अधिकांश समय कोहली कट बाल कटवाने में बीत जाता है । ऐसे में मास्टर का बेटा तो किसी सैलून मास्टर ही बनेगा-स्कूल का नहीं !

अब रही बात किसान का बेटा किसान ही बनेगा तो इसकी अब कोई फूली महुआ की तरह गारंटी नहीं है । हां वो एक नम्बर का शराबी बन सकता है, जुआरी बन सकता है,चरसी बन सकता है,इसका कोई भी गारंटी दे सकता है ! मैं भी ! और आप भी !
कारण स्पष्ट है! जितना उसका आचरण स्पष्ट नहीं है । वो मोबाइल चलाना तो जानता है पर हल जोतना उसे नहीं आता । शराब पीना उसे खूब आता है परन्तु खेत में कुदाल करना नहीं आता है।जुआ वो दिन भर खेल सकता है लेकिन खेत में घंटा भर वह काम नहीं कर सकता है । नतीजा पूर्वजों ने टांड-टुंगरी काट कर जो खेत बनाये उस पर धान की खेती करना छोड़ राशनकार्ड वाला चावल खाता है और मोटरसाइकिल से हगने जाता है ! अब ऐसे में कोई किसान बने तो कैसे ? आप बन सकते हैं तो बनिए ?
बात की शुरुआत नेता पुत्रों की राजनीतिकरण से हुई थी तो नेता का बेटा नेता ही बनेगा इसका फूल गारंटी कोई भी दे सकता है । उसका पड़ोसी पुत्र भी !
अभी देश में दो ही पुत्रों का स्वर्ण युग चल रहा है ‌ । एक नेता पुत्रों का । दूसरा पुजारी पुत्रों का ! कभी कभी नेता का पड़ोसी पुत्र भी नेता बन जाता है लेकिन पुजारी होने के लिए पुजारी पुत्र होना निहायत जरूरी है।वो चाहे जिधर से जन्मा हो पर बाप वाला मुहर पुजारी का ही होना चाहिए । दास-दासी पुत्रों का यहां कोई दखल नहीं चलता है । हिस्से में हक के लिए दासी लड़ सकती पर उसका संकर संतान पुजारी कभी नहीं बन सकता-बनेगा तो पुजारी पुत्र ही बनेगा ।
अब सीधे बात करते हैं नेता पुत्रों का राजनीतिकरण की तो इसके लिए आज उसे किसी द्रोणाचार्य के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। नेता पुत्रों में नेता बनने का गुण जन्मजात आ जाता है । कुछ विशेष करना नहीं होता । बस एक आध बलात्कार कर दे, नशे में दो चार का हाथ पैर तोड़ दे-गाडी भी किसी पर चढ़ा सकता है । और अगर जल्दी नेता बनना है तो एक दो का मर्डर कर जेल चला जाए । लौटेगा तो नेता बन चुका होगा !
माला और टिकट लिए कई दल के नेता बाहर उसके इंतजार में खड़ा होगा !
देश में नेता पुत्रों का राजनीतिकरण भले ही कांग्रेस की कोख से निकला हो परन्तु देश में राजनीति का अपराधीकरण -भगवाकरण भाजपा की देन है । ऐसा आप मान सकते हैं । कोई दुविधा नहीं है ‌। दूसरे शब्दों में नेता पुत्रों का राजनीतिकरण करने में कांग्रेस अगर मां है तो भाजपा को आप बेधड़क उसकी मौसी कह सकते हैं । इतिहास गवाह है । धरती पुत्र सरदार पटेल जब देशी रियासतों का राष्ट्रीयकरण कर रहे थे तब नेहरू देश में राजनीति करण करने में लगे हुए थे ।
इतिहास इस बात का भी गवाह है कि जब एक हवाई पायलट को देश का पायलट बना दिया गया तो नेता पुत्रों का राजनीतिकरण की जैसे होड़ सी लग गई थी ।
बीजू पटनायक का पुत्र, नवीन पटनायक नेता बना । अमित शाह का बेटा जय शाह क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई का सचिव बना, यशवंत सिन्हा का जयंत सिन्हा नेता बना । मुलायम का अखिलेश बना तो राजनीति का दूध निकालने लालू का बेटा तेजस्वी लालटेन लेकर आ गया । और तो और झारखंड में शिबू सोरेन ने बेटों का राजनीति करण ही नहीं किया बल्कि उन्होंने पार्टी को ही बेटा करण कर दिया ।
युगे युगे नेता पुत्रों का राजनीतिकरण में कभी कोई कमी नहीं आई । अगर कमी आई तो राजनीति में सुचिता वाद की, विचार वाद की,। इस मामले में नीतीश कुमार सबसे पीछे रह गए । वे संविद पात्रा जैसा एक -आध बेटा भी जुगाड नहीं कर पाए । उधर
नेता पुत्रों की राजनीतिकरण मंच में माननीय प्रधानमंत्री जी आज भी देश में नम्बर वन वने हुए हैं । उनके चारों धर्म पुत्र अम्बानी-अडानी, और पेट्रोल-डीजल ! कमाई के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर मोदी जी के लिए स्वर्ग लोक जाने के लिए अभी से ही गोल्डेन सीढ़ी बनाने में जुट गए हैं ….!!
आप ताली-थाली बजाते रहिए !
मैं मांदर लेकर आता हूं !

— श्यामल बिहारी महतो

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