मुक्तक/दोहा

चार मुक्तक

नारी परिवार का श्रृंगार है,
सृष्टि का आधार है ।
नारी ममता से भरा सागर-
अपमान हो तो अंगार है ।।
नारी अबला नहीं होती है,
वह तो बहुत सबला होती है ।
नारी प्रेम की मूरत –
शौर्य का वरदान होती है ।।
नारी का अपमान न करो,
उसके रौद्र रूप से डरो ।
नारी मां, बहिन, बेटी, पत्नी –
नारी का हमेशा सम्मान करो ।।
धरती को स्वर्ग बनाना है,
हर घर -आंगन महकाना है ।
नारी हो जाये पूर्ण निडर-
हमें ऐसा समाज बनाना है ।।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा