सामाजिक

भाषा आपके व्यक्तित्व का आईना है

लोगों की मानसिकता का लेवल कितना गिरता जा रहा है, भाषा और वाणी पर काबू खोते ये भी भान नहीं रहता की किस व्यक्ति के लिए कैसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। पिछड़ी जाती या अनपढ़ लोगों का तो समझे की चलो इनको इतनी समझ नहीं होती, पर जब  राहुल गांधी, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी जैसे पढ़े लिखे समझदार और खुद को बड़े होशियार समझने वाले लोग भी माननीय प्रधानमंत्री जी के बारे में अनाप-सनाप और निम्न भाषा में बात करते है तब ताज्जुब भी होता है, और बुरा भी लगता है।
सोचो तो सही आप देश के प्रधानमंत्री के बारे में बात कर रहे है, नांकि कोई फ़ालतू और एरे गैरे इंसान के बारे में। एक गरिमा होनी चाहिए, एक सम्मान होना चाहिए अपने देश के प्रधानमंत्री के लिए। ऐसा कभी भी किसी समय किसी भी माध्यम से नहीं होना चाहिए, जिसमें हमारे देश की प्रधानमंत्री की पद की गरिमा को ठेस पहुंचे। इसके साथ ही अभी तक जितने हमारे प्रधानमंत्री हुए और स्वर्गवासी भी हो चुके है उनके लिए भी अश्लील टिप्पणी, गाली गलोच और बिना सिर पैर की बातें करने से बचना चाहिए। और जो लोग ऐसा करते है उनके ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कानून लागू करके कार्यवाही की जानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर आम लोग भी प्रधानमंत्री मंत्री को कोसते इनके कपड़े, जूते, व्यक्ति और हर चीज़ के लिए न जाने क्या-क्या बोलते रहते है। अरे भै एक उभरते हुए देश के प्रधानमंत्री है, देश विदेश में जाते है तो क्या फटेहाल जाएँगे? बड़े-बड़े देशों में प्रबुद्धों के साथ उठते-बैठते है तो क्या आम इंसान बनकर जाएंगे। प्रधानमंत्री का एक क्लास, ब्रांड लेवल और पर्सनैलिटी होनी चाहिए कि एंट्री होते ही सबकी नज़रों को चकाचौंध कर दें। आज विश्व के सारे बड़े देशों में हमारे प्रधानमंत्री की स्टाइल और स्पीच की चर्चा होती है, कौन पूछेगा अगर खुद की पर्सनैलिटी पर ध्यान नहीं देंगे। राजीव गांधी की शानों शौकत नहीं देखी थी क्या? प्राइवेट जेट में ब्रांडेड जाते और कपडों के साथ उतरते थे तब तो सबको प्राउड फिल होता था।
जहाँ देश विदेश के लोगों को हमारे प्रधानमंत्री में कुछ बात दिखती है, उनका काम दिखता है, उनके व्यक्तित्व से अभिभूत है वहाँ हमारे ही देश में प्रधानमंत्री की शान में न जाने क्या-क्या बकवास होती रहती है। इंसान को खुद इतनी समझ होनी चाहिए की क्या बोलना है, भाषा कैसी उपयोग करनी है। एक इंसान के कंधे पर पूरे देश का बोझ है, चार-पाँच व्यक्तियों का खुद का परिवार संभाल नहीं पाते ऐसे लोग भी प्रधानमंत्री के बारे में गिरे हुए शब्दों में न जानें क्या-क्या बोल देते है। अच्छा न बोल सको चलेगा कम से कम अपनी सोच का प्रदर्शन करते खुद को ही इतना मत गिरा लो की आपकी भाषा और व्यक्तित्व से आपके संस्कार साबित हो। भाषा आपके व्यक्तित्व का आईना है।
माना कि विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन द्वेष देश की प्रगति के लिये बहुत घातक है, इस आजादी को बोलने का अधिकार नहीं समझा जा सकता।
शायद एक कानून भी है प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ या उनकी शान में अगर कहीं कोई किसी पब्लिक प्लेस में कुछ कह रहा है तो सेक्शन 294 के साथ-साथ अन्य धाराओं से भी चार्ज किया जा सकता है, जैसे सेक्शन 294 के साथ-साथ सेक्शन 499 भी लग सकता है, तो इस कानून को थोड़ा सख़्त बनाकर ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ एक्शन लेना चाहिए जो देश के प्रधानमंत्री के बारे में कहीं भी कुछ भी बोल देता है।
— भावना ठाकर ‘भावु’