आत्मकथा

कैसा रहा साल 2021-आत्मकथा

संघर्ष एवं कष्ट दायक रहा साल 2021 मेरे लिए साथ ही जीवन में उतार चढाव तो लगे ही रहते हैं, बात करते हैं साल 2021की जो निम्न है –
जनवरी- साल के पहले महीने में आई० सी० एम० आर०,आर० ०एम० आर० सी० से सम्बद्ध ऐन० आई० आर० टी० के टीबी के प्रोजेक्ट में स्वास्थ सहायक के पद पर पहले से कार्य करते हुए घर से 9 जनवरी को मिर्जापुर के लिए निकल गए गए मिर्जापुर में नई जिम्मेदारी यू०डी०सी० पद का कार्य भार संभाला | उसी बीच 21 जनवरी को लोकप्रिय लेखक डॉक्टर जे० एस० बिंद जी के उपन्यास मि० जीरो मैन के समारोह में बनारस में शामिल हुए | कोरोना की पहली लहर खत्म हुई फिर काम के चलते मिर्जापुर की विधानसभा छानवे एवं विद्यांचल में मां विंध्यवासिनी, माता अष्टभुजा, माता शीतला के दर्शन किये,चुनार ब्लॉक में काम करने के साथ-साथ जरगो डैम एवं लखनिया दरी का भ्रमण किया | 26 जनवरी का पावन पर्व चुनार ब्लाक के ग्राम को कुदारन के एक विद्यालय में मनाया |
फरवरी – सोनभद्र जिले के दुधी ब्लाक जो कि आदिवासी क्षेत्र है, उसमे टी०वी० की बीमारी का प्रीवलेंस के लिए पूरी टीम के साथ काम किया, काम रोचक रहा राबर्ट्सगंज से दुधी के बीच 20 किलोमीटर आदिवासी क्षेत्र में होकर निकलना पड़ता था |  निलकते समय बहुत डर रहता था, साथ ही उस जगह के रेणुकूट मंदिर, औद्योगिक जगह शक्तिनगर आदि जगह से रूबरू हुए | उसी महीने में बनारस जाकर बाबा काशी विश्वनाथ जी के दर्शन किए साथ ही भगवान गुहराज निषाद राज घाट, मणिकर्णिका का घाट, अस्सी घाट, दश्मेश्रर घाट, आदि घाटों का भ्रमण किया | साथ ही अशोक स्तंभ, बौद्ध मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, सारनाथ मंदिर, भोलेनाथ जी का सारकनाथ मन्दिर के दर्शन किए साथ उसी महीने में जिला मऊ, महाराजपुर की यात्रा की |
मार्च – 11 मार्च को सहयोगी संकलन कालेश्वर ज्योति का बाबा बटेश्वर नाथ धाम में विमोचन किया है | जिसमें मुख्य रुप से मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, विष्णु प्रताप निषाद, पत्रकार बालकिशन, भूरी सिंह निषाद, सीओ बाह मुख्य महन्त बटेश्वर नाथ मंदिर आदि लोग सम्मिलित हुए, उसी महीने में जौनपुर में काम के चलते जिलेभर का भ्रमण किया | साथ ही जौनपुर का किला भी देखा |
अप्रैल – अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर के चलते आई०सी०एम० आर० बी० आर० डी० मेडिकल कॉलेज में बी०एस० एल० लैब 3 में काम करना पड़ा, उसी बीच मित्र राम पूजन एवं सतेंद्र भाई ने पूरे गोरखपुर का भ्रमण कराया एवं गोरखपुर में जंगल वाली माता, रामघाट, रेल म्यूजियम आदि देखने मिला |
मई -कुछ खास नहीं रहा समय का पहिया चलता ही रहा
जून- जून माह  में कोविड-19 के नए सिरे से सीरो-,सर्वे के तीसरे चरण के चलते जिला गोंडा, बलरामपुर, मऊ, की यात्रा की | साथ ही टीवी के कार्यों को लेकर सुल्तानपुर में काम किया है, पहली बार पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर चलकर देखा जो कि कार्य निर्माणधीन था |
जुलाई- जुलाई का माह मेरे परिवार और मेरी जिंदगी में अहम था, 3 जुलाई 2021 को मेरी बिटिया कुमारी निवेदिता का लक्ष्मी रूप में मेरे घर में आगमन हुआ तथा 29 जुलाई को निवेदिता के नामकरण पर माननीय विधायक श्री जितेंद्र वर्मा जी के कर कमलों से ग्राम पंचायत लोहिया उझावली में 501 पौधों का वृक्षारोपण करने का काम किया |
अगस्त – इस माह में 12 अगस्त को डेंगू का मेरे ऊपर बहुत ज्यादा प्रकोप रहा हालत बहुत खराब थे साथ ही 15 अगस्त को आजादी के ही दिन मेरे साथ पूरी टीम बेरोजगार हो गई | 21 अगस्त को गोरखपुर से मैने पलायन  कर लिया |
सितम्बर- बेरोजगारी के कारण घर में आर्थिक तंगी ने अपनी जड़े मजबूत बना ली एवं डेंगू बुखार के चलते परिवार के लगभग सभी सदस्यों को बीमारी की यातना सहन करनी पड़ी | इस माह में लगभग डेढ़ लाख रुपए दवाइयां वह चेकअप में खर्च हो गए, रोजगार के लिए कई जगह हाथ-पैर फेंके लेकिन कहीं जुगाड़ ना बन सकी |
अक्टूबर- डेंगू की मार इतनी भयानक रही कि 3 महीने 8 दिन की मेरी बिटिया कुंवारी निवेदिता हम सब को अकेला छोड़कर इस दुनिया से हमेशा के लिए चली गई | अगर फतेहाबाद में फर्जी लैब वाले अलग-अलग रिपोर्ट ना देते तो शायद मेरी बिटिया की मृत्यु ना होती | एवं उसी माह मेरी आंख में चोट लग गई | 24 अक्टूबर को सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन में सहयोग किया | एवं 31 अक्टूबर को कोठी मीना बाजार में डॉ०अमी आधार निडर जी के पवेलियन में “कालिका दर्शन” सहयोगी संकलन का मित्र मुकेश कुमार ऋषि वर्मा जी के साथ विमोचन किया |
 नवंबर – आर्थिक तंगी के चलते खेत में आलू बोने के लिए अपनी उनतीस हजार की भैंस बेचनी पड़ी, घर में लगभग 6 से 7 सदस्य बीमार हो जाने के कारण सारे पैसे खर्च हो गए एवं आधे-अधूरे खेत बिना फसल बोए रह गए साथ ही 17 नवंबर से एलएलबी की परीक्षा दी |
दिसंबर- दो वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद 15 दिसंबर को फतेहाबाद तहसील में केवट/मल्लाह जाति के प्रमाण पत्र जारी करवाने में सफलता हासिल की | सहयोग करने बालों में विष्णु प्रताप निषाद, भूरी सिंह, महेश निषाद, श्रीचंद निषाद, विष्णु निषाद आदि युवा पीढ़ी ने पूर्ण सहयोग किया |
कुल मिलाकर पूरा वर्ष भाग दौड़ में निकल गया, इसवर्ष साहित्य क्षेत्र में कुछ खास सफ़लता नहीं मिली फिर भी छुट पुट रचना, लघुकथा, कविता, संस्मरण, कई शहरों से दैनिक एवम साप्ताहिक अखबारों एवम पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही, आशा करते हैं ये साल सभी के लिए कुशल निकली होगी |
           अगर जिन्दगी रही तो अगले वर्ष फिर मिलेंगे………
— अवधेश कुमार निषाद मझवार

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