सामाजिक

नया वर्ष-नया संकल्प–नया उत्साह

“नेह निभाने आ गया,एक और नव वर्ष।
 आओ,हम आगे बढ़ें,लेकर मन में हर्ष।।”
हर नया साल कुछ नई उम्मीदें लेकर आता है और बहुत से लोग हर बार नववर्ष पर संकल्प करते हैं लेकिन इनमें से अधिकांश संकल्प टूट जाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इनका टूटना लाजमी है क्योंकि आधे-अधूरे मन से सिर्फ रस्म अदायगी के लिए किए गए वादे कभी पूरे नहीं होते।
नववर्ष एक अच्छा अवसर होता है, जिसमें अपनी बुरी आदतों को त्यागने और अपनी जीवनचर्या में सुधार के संकल्प किए जा सकते हैं। यह संकल्प सालभर चल सके इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति इनके लिए पहले से तैयारी करे, अपना मन बनाए और दृढ़ इच्छाशक्ति से काम लें।मनुष्य का स्वभाव है कि वह नई चीजों से आकर्षित होता है, नई परिस्थितियों के बारे में योजनाएं बनाता है। यही वजह है कि लोग नए साल के अवसर पर नए संकल्प करते हैं।यह आम प्रवृत्ति है कि आदमी भविष्य को लेकर आशान्वित रहता है। हर कोई चाहता है कि आने वाला समय उसके लिए अच्छा साबित हो, इसीलिए वह भविष्य के स्वागत में अपने में भी बदलाव की कोशिश करता है और बदलाव की इसी इच्छा को वह नए संकल्पों के रूप में व्यक्त करता है।
नए साल पर अधिकांश लोग नशे की अपनी आदत को छोड़ने अथवा अपनी जीवनचर्या से संबंधित संकल्प करते हैं। जैसे- मंदिर जाना, सुबह जल्दी उठना, मॉर्निंग वॉक का नियम, रोज धर्म से सं‍बंधित किताबें पढ़ना आदि…..। इन संकल्पों के पीछे यह मूल भावना होती है कि उनके जीवन की गुणवत्ता बढ़े। वे अधिक समय तक स्वस्थ जीवन जी सकें। नए वर्ष पर लोग संकल्प तो करते हैं, लेकिन देखने में आता है कि अधिकांश लोग जल्द ही इन्हें तोड़ भी देते हैं।
संकल्प तोड़ने की सबसे बड़ी वजह यह होती है कि ये बिना जरूरी तैयारियों के किए जाते हैं। नशे की आदत अगर पुरानी हो तो इसे रातों रात नहीं बदला जा सकता। संकल्प लेना अच्छी बात है लेकिन इसके लिए खुद को तैयार करना पड़ता है और अपने मन को मजबूत करने की जरूरत पड़ती है।

  हमें जोश में नहीं,बल्कि होश में संकल्प लेना चाहिए,और आत्मबल को जाग्रत करते हुए संकल्प पूर्ण करने के लिए प्रयत्नरत् रहना चाहिए।यदि हम अपनी इच्छा शक्ति को दृढ़ता के साथ जाग्रत कर लें,तो फिर कोई कारण नहीं कि हमें निराश होना पड़े।
   “नया साल गाने लगा,शुभ-मंगल के गीत।
  आओ,नव संकल्प के,बन जाएँ मनमीत।।”
— प्रो. (डॉ) शरद नारायण खरे