कविता

जीवन एक प्रश्नपत्र

ये जीवन क्या है
इसे देखने का सबका नजरिया है,
कोई माने न माने
ये उसकी मर्जी है
मगर ये जीवन एक प्रश्नपत्र है
इससे भला इंकार कौन कर सकता है।
जीवन के हर पल हर हिस्से में
एक प्रश्नपत्र सामने होता है,
उसे हल करना ही पड़ता है
ये अलग बात है कि पास फेल होना
सबकी अपनी अपनी नियति है।
शैक्षिक प्रश्नपत्र हल करने के लिए
आप तैयारी कर सकते हो,
कैसे प्रश्न आयेंगे जान भी जाते हैं
कोर्स से बाहर कुछ नहीं होगा
कितने प्रश्न हल करने हैं और
कितने छोड़ सकते हैं ?
ये विकल्प भी होगा,
कितने निर्धारित है, जो करना है
ये सब हमें पहले से पता होता है।
मगर जीवन के प्रश्नपत्र में
ऐसा कुछ भी नहीं होता है,
पास फेल की चिंता सिर्फ़ कर सकते हैं
मगर हम चाहें न चाहें
हर प्रश्नपत्र हल करना ही पड़ता है।
आप हर परीक्षा से भाग सकते है
प्रश्नपत्र फाड़ भी सकते हैं,
मगर जीवन की परीक्षा से
भागकर कहीं जा नहीं सकते हैं
प्रश्नपत्र हल करने से बच नहीं सकते।
क्योंकि आपके पास बचने के
कोई रास्ते ही नहीं है।
जीवन के प्रश्नपत्र निर्धारित नहीं हैं
न ही कोई निश्चित समय है
न ही प्रश्नों का निर्धारण, विकल्प नहीं है
प्रश्नपत्र कैसा हो कुछ पता नहीं होता
क्योंकि इसका कोई पाठ्यक्रम
या प्रारूप निश्चित नहीं होता।
भागिए चाहे जितना आपको प्रश्नपत्र
अनवरत हल करते ही रहना पड़ते है,
क्योंकि प्रश्न कभी खत्म नहीं होता है।
जीवन की आखिरी साँस तक
जीवन की परीक्षा देना ही पढ़ता ही है
तभी तो कहना पड़ता है कि
जीवन एक प्रश्नपत्र है
जिसे हल करते ही रहना पड़ता है
पास फेल भी होना ही पड़ता है