मुक्तक/दोहा

नव वर्ष

सुदिन सुमंगल मय रहे मास बारहों खास |
जीवन में उल्लास हो पूरण हो हर आस ||

मंगल मय हो वर्ष यह ..घिरे न गम की छाँव |
प्रीत पले उर में सदा ,मंजिल पायें पाँव ||

नवल भास्कर उदित हो फैलाये उजियार |
मिटे तमस जग का सकल कहीं न हो अँधियार ||

सदगुण से परिपूर्ण हो अब मनु की संतान |
नफ़रत भ्रष्टाचार से मनुज रहे अंजान ||

©®मंजूषा श्रीवास्तव’मृदुल’

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