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विश्व हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन

निज भाषा निज देश का होता नहीं विकल्प।

हिन्दी के प्रचार का ले लो सब संकल्प ।। नरेन्द्र सिंह नीहार

दिल्ली, विश्व हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिन्दी की गूंज व काव्यवृष्टि पटल के संयुक्त तत्वाधान में हिंदी का शंखनाद कवि सम्मेलन का ऑनलाइन आयोजन किया गया। कविगणों ने दोहे, कविता, गीत, मु्क्तक आदि के माध्यम से हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में पूर्णतः प्रतिष्ठित करने और उसे विश्व भाषा तक ले जाने के लिए प्रयत्नशील रहने के अपने भाव प्रकट किये। शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ।

 विश्व हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को देर शाम देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिन्दी की गूँज तथा काव्य वृष्टि पटल के संयुक्त तत्वाधान में ऑनलाइन आयोजित शंखनाद कवि सम्मेलन का शुभारंभ भावना अरोड़ा ‘मिलन’ द्वारा मधुर कंठ से माँ सरस्वती वंदना से हुआ। हिंदी की गूँज संस्था के मीडिया प्रभारी प्रमोद चौहान प्रेम ने हिंदी को बढ़ावा देमे की कामना करते कहा कि-

हिंदी भाषा प्रेम की, हिंदी से हो प्रेम।

हिंदी में पूछे सभी, हाल ओ कुशलक्षेम।।

डॉ ममता श्रीवास्तव ने कहा कि-

आ गया है साल बाईस, दिल में उठ रही हैं तमाम ख्वाहिश।

डॉ संजय सिंह ने कहा कि-

हिन्दी हिन्द की संस्कृति, अतीत का गौरव गान है।

राष्ट्र की जन-जन की भाषा, हिन्दी हिन्द का अभिमान है।

संस्था के सहसंयोजक रमेश गंगेले ने हिंदी की स्थिति पर अपने भाव व्यक्त करते कहा कि-

अपनी जननी को साबित जब करना पड़ता हो।

हिंदी की रक्षा की खातिर हिंद में लड़ना पड़ता हो।।

भावना अरोड़ा मिलन ने नारी के मन की व्यथा को प्रकट करते हुए कहा कि –

अष्टभुजाधारी बन काम करत है नारी,

नारी को भी मन है समझ आनो चाहिए।

पतिदेव बैठ कें बस हुकुम चलात हैं,

हाथ सें मोबाइल बस खेंच लेना चाहिए ।।

कुशल संचालिका डॉ वर्षा सिंह मुम्बई ने हिंदी को प्रोत्साहन देने की बात करते कहा कि-

हिंदी के दुख दर्द सब, ऐसे होगें दूर।

घर घर में जब सब पढ़े, तुलसी, मीरा, सूर।।

दूसरे भाग के शुभारंभ में वरिष्ठ कवि कामता प्रसाद ने कहा कि-

हमारी हिंदी हिंदुस्तान, यही है हम सबकी पहचान।

सात समंदर पार गई, हिंदी की गूंज महान।।

 सपना कुमार मुम्बई से कहा कि

हिंदी हमारी जननी है और वतन हिंदुस्तान है।

हम सब हैं हिन्दुस्तानी …. ।

प्रसिद्ध गीतकार व साहित्यकार डॉ विनोद प्रसून ने कहा कि-

सरस, सरल, मनोहारी है।अपनी हिंदी प्यारी है।। उन्होंने कहा कि-

हमारी भारतीयता की सरस पहचान है हिंदी।

हमारी आत्मा में गूँजता इक गान है हिंदी।।

तरुणा पुंडीर तरुनिल ने कहा कि-

एक दिन का पर्व नहीं मैं तो युगों का गर्व हूँ,

बचपन की किलकारी से माँ की लोरी तक,

अलौकिक प्रेम के अनकहे शब्द हूँ।

मां की चिंता हूँ ,पिता का दुलार हूँ,

भाई का आश्वासन ,बहन का संसार हूँ।

मैं एक भाषा नही मैं तो एक परिवार हूँ।

झारखंड से जुड़े कवि व कहानीकार नीरज नीर ने कहा कि-

उनको भी नया साल मुबारक, तुमको भी नया साल मुबारक।

चमचम चमकते मोल के पीछे गंदी लेन मुबारक।।

बस के पीछे लटके लोगों तुमको बुलेट ट्रेन मुबारक।

कार्यक्रम के संयोजक एवं संचालक नरेन्द्र सिंह नीहार ने अपना संकल्प इन शब्दों में व्यक्त किया –

निज भाषा निज देश का होता नहीं विकल्प।

हिन्दी के प्रचार का ले लो सब संकल्प ।।

कार्यक्रम का सफल संचालन काव्यवृष्टि पटल संचालिका व प्रखर वक्ता डॉ वर्षा सिंह व शिक्षाविद व साहित्यकार नरेंद्र सिंह नीहार ने किया। कार्यक्रम में  पीयूष चौहान, नरेंद्र सिंह नरूका, नेहा, संजय कुमार सिंह, रश्मि मिश्रा, निर्मला जोशी, गिरीश चंद जोशी, खेमेन्द्र सिंह चन्द्रावत,उर्मिला रौतेला राकेश जाखेटिया, तपस अग्रवाल, लता नोवल, हिमांशी अरोड़ा, उमैरा खातून, स्नेहा मनचंदा, धर्मेंद्र सिंह, उपासना, सुनीत कुमार आदि ने कार्यक्रम से जुड़कर कविगणों का उत्साह बढ़ाया।