मुक्तक/दोहा

नव वर्ष

सुदिन सुमंगल मय रहे मास बारहों खास |
जीवन में उल्लास हो पूरण हो हर आस ||

मंगल मय हो वर्ष यह ..घिरे न गम की छाँव |
प्रीत पले उर में सदा ,मंजिल पायें पाँव ||

नवल भास्कर उदित हो फैलाये उजियार |
मिटे तमस जग का सकल कहीं न हो अँधियार ||

सदगुण से परिपूर्ण हो अब मनु की संतान |
नफ़रत भ्रष्टाचार से मनुज रहे अंजान ||

©®मंजूषा श्रीवास्तव’मृदुल’

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016