गीत/नवगीत

उठो देश के सजग प्रहरियों

उठो देश के सजग प्रहरियों, आ जाओ मैदान में,
लोकतंत्र का बिगुल बज गया, हिस्सा लो मतदान में।।
जगह-जगह पर प्रत्यासी हैं,
नेता बनने के अभिलाषी है।
तरह-तरह के लोभ दे रहे,
जनता को बेमोल ले रहे।
लेकिन हमको डिगा न सकते,
ये बंजारे मतदान में।।१।।
उठो देश के……
तुमको देश निहार रहा है,
श्री राम को बुला रहा है
भारत विश्वगुरु बन जाये
हम ऐसी सरकार बनाएं
श्रीराम कृष्ण का काम करें,
हम भारत के सम्मान में।।२।।
उठो देश के……
संस्कृति सबकी अक्षुण्ण हो,
घर में मङ्गल खुशहाली हो।
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार मिले,
पथ, आंगन और छांव मिले।
कोई कभी झुका न पाए,
हमको भारत के स्वाभिमान में।।३।।
उठो देश के……
माताएं, बहन सुरक्षित हों,
ऊंच- नीच, का भेद न हो
श्रमिक, किसान खुशहाल बने
भारत पुनः अखण्ड बने
उठो शत्रु का सन्धान करो,
केशरिया के अभिमान में
उठो देश के सजग प्रहरियों, आ जाओ मैदान में,
लोकतंत्र का बिगुल बज गया, हिस्सा लो मतदान में।।

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