कविता

मीराबाई

भक्तों में सिरमौर है मीरा,
सन्तों में सिरमौर है मीरा।
कवियों में सिरमौर है मीरा,
भारत की पहचान है मीरा।।

कुड़की गाँव में जन्मी वह ,
जोधा की पड़पोती थी।
राठौड़ वंश में जन्मी मीरा,
भारत की है शान मीरा।।

रत्न सिंह की पुत्री थी ,
भोजराज की पत्नी ।
बचपन से दृढ़ निश्चयी मीरा,
भारत की पहचान है मीरा।।

बचपन में माता को खोया ,
बाबा दूदा राव ने पाला ।
भक्तों में भक्त है मीरा ,
भारत की पहचान है मीरा।।

बचपन में पायी एक मूरत ,
गिरधर गोपाल की।
हो गई दीवानी मीरा
सांवरे नन्दलाल की।.

भाव मग्न नृत्य से,
गिरधर रिझाती है मीरा।
प्रेम मग्न भाव से,
कृष्ण को पाती है मीरा।।

राणा ने भेजा विष का प्याला,
मीरा ने पाया अमृत का प्याला।
हँसते-हँसते पी गई मीरा,
भक्तों में सिरमौर है मीरा।।

साँवरिया रंग में रंग गई मीरा ,
वंशी - ध्वनि में रम गई मीरा।
सन्तों में सिरमौर है मीरा ,
भारत की पहचान है।।

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