कविता

आखिर पिता ही सब कुछ है

पिता जी है तो सब कुछ है,
अगर घर है हमारे पास |
वो सब है पिता जी की,
धन-संपत्ति भी पिता की देन है ||
              आखिर पिता ही सब कुछ है………………..
पिता है तो मान-सम्मान है,
पिता है तो सब कोई अपने है|
उनके बिना सब सपना है,
वो है तो हमारी इज्जत है ||
               आखिर पिता ही सब कुछ है……………….
पिता जी ही हैं भगवान हमारे,
ब्रह्मा,विष्णु,महेश, हैं पिता हमारे |
पिता ही सब देवों में महान है,
अधूरा है आशीर्वाद बिना उनके ||
                आख़िर पिता ही सब कुछ है………………..
पिता ही सिर पर अम्बर हैं,
वो ही हमारे संसार है |
पिता हैं तो सब कुछ निदान हैं,
वो ही सब विपत्तियो का हल है ||
                 आखिर पिता ही सब कुछ है…………………
पिता जब एक होकर के भी,
परिवार का ख्याल रखते हैं |
पिता जी है तो कोई फिक्र नहीं मुझको,
मझवार बखान नहीं कर सकता पिताजी का ||
                  आखिर पिता ही सब कुछ है……………….
— अवधेश कुमार निषाद मझवार