हाइकु/सेदोका

तीन हाइकु

     1
बसंत ऋतु
खिले प्रणय पुष्प
दिल मचला।
     2
प्रेम की भाषा
आँखें हुई चंचल
निंदिया दूर।
       3
जीना बेकार
प्रेम स्पर्श न मिला
प्यासा हृदय।
— निर्मल कुमार डे