बाल कहानी

मास्टर जी का सबक

आज मास्टर जी कक्ष् मे हाजरी ले रहे थे,तभी भोलू का नाम देखकर ठिठक गए। चुप्पी साधते हुए-
भोलू!
नाम पुकारते हैं।कोई हाजरी के लिए खड़ा नही होता।
पुनःभोलू का नाम जोर से लेते हैं।
पर कक्षा में सन्नाटा।
तभी पीछे से एक लड़का कहता है-
“मास्टर जी! उसकी तबियत खराब थी,कुछ दिन शाला आया,
पर अभी नही आ रहा।”
मास्टर जी जिज्ञासावश-
“तो क्या अभी ठीक है?”
तब वह लड़का कहता है-
“जी मास्टर जी।”
तब मास्टर जी हामी भरते हुए-
“तो अभी क्यों नही आ रहा?
लड़का कहता है-
“छःमाही परीक्षा में फेल हो गया था।और वह कहता है नही पढूंगा।”
मास्टर जी कुछ सोंच में पड़ जाते हैं।और फिर सम्पर्क करने की ठान लेते हैं।
ठीक दूसरे दिन मास्टर जी शाला न जाकर सीधा भोलू के घर पहुँच जाते हैं।
शाला जाने का समय तो था ही।जैसे ही उसके घर पहुचे देखकर आश्चर्यचकित हो गए।भोलू के पिता जी बार-बार समझाइस दे रहे थे-
“जा बेटा जा!
पढाई करले!पढाई करेगा तो बड़ा आदमी बनेगा।हमारी तरह…!
पर भोलू टस से मस नही हो रहा था।उसके मन मे हीन भावना घर कर गई थी।कि वह कभी भी पढाई नही कर सकता।और न ही कभी उसके अच्छे अंक आ सकते।
तभी मास्टर जी-“भोलू!!
की आवाज लगाते हैं।
भोलू छिप जाता है।उसके पिताजी
“आइए मास्टर जी कहते हुए अभिवादन कर बिठाते हैं।”
तभी मास्टर जी बोल उठते हैं-
“भोलू की तबियत ठीक है न?और शाला क्यो नही आ रहा?”
तभी उसके पिता जी कहते हैं-
“क्या बताऊँ मास्टर जी मैं तो समझाते-समझाते थक गया।अच्छा हुआ आप आ गए आप ही समझाइए!”
तभी मास्टर जी प्यार से आवाज लगाते हुए- “बेटा भोलू!!
भोलू सहम जाता है।
फिर उसके पिता जी प्यार से मास्टर जी के पास लाते हैं।भोलू डरा सहमा आता है।
मास्टर जी वस्तु-स्थिति को समझाते हुए कहते हैं-
“बेटा भोलू “जहां चाह होती है वहाँ राह भी होती हैं।”तुम इतने हताश और निराश क्यों हो?तुम्हारे बारे में मैं सब कुछ जान गया हूँ।अब तुम मन से हीन भावना और चिंता छोड़ दो।तुम पुनः पुरी शक्ति के साथ पढाई में लग जाओ।असफलता ही व्यक्ति को सबक सिखाती है।और कोशिश करने से सफलता जरूर मिलती है।कोशिश करने वालों की कभी हार….।मास्टर जी कहते हैं देखो भोलू जब तुम्हारे कक्ष का एक कमज़ोर बालक होशियार हो सकता है।तुम तो हो ही।तुम सफल क्यो नही हो सकते?
भोलू को समझते देर नही लगी और चुपचाप बस्ता उठाकर शाला के लिए रवाना हो गया।
भोलू मन लगाकर पढाई करने लगा।और वार्षिक परीक्षा सम्पन्न भी हो गई।सबसे बड़ी खुशी की बात यह थी कि पूरी शाला में भोलू का अंक सबसे ज्यादा आया।भोलू को बधाई ऊपर बधाई मिल रही है।आज भोलू मास्टर जी के सबक को याद करते हुए धन्यवाद देने उनके कक्ष् में पहुँचा।मास्टर जी को जैसे ही देखा उनके चरणों मे गिर पड़ा।मास्टर जी उठाकर अपने सीने से लगा लिया दोनों की ऑंखें एक दूसरे को भिगो रही थी।और कक्ष् में पुनःबधाई हो भोलू! बधाई हो!की आवज गूँजने लगी।

— अशोक पटेल “आशु”