गीतिका/ग़ज़ल

दिल पर रंग

दिल पर रंग चढ़ा कर देखो,
गीत लबों पर ला कर देखो।
दुनियां दरी यूँ ही चलेगी ,
दिल अपना बहला कर देखो।

पशोपेस में उम्र गुज़री ,
दिल तो ज़रा लगा कर देखो।
मीत मिला जो मन का यारों ,
उस पर प्यार लुटा कर देखो।

मौसम इतना हँसी हो गया है,
पलकें ज़रा उठा कर देखो ।
कभी हो नग़मा कभी हो आँसू,
धड़कन आग बना कर देखो।

मंज़िल को पाना है रही ,
एक -एक क़दम बढ़ा कर देखो।
जाति वर्ग की जगह न कोई ,
हर दीवार हटा कर देखो ।

— आसिया फ़ारूक़ी

*आसिया फ़ारूक़ी

राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका, प्रधानाध्यापिका, पी एस अस्ती, फतेहपुर उ.प्र