गीतिका/ग़ज़ल

ईद मुबारक

है चमका चांद बरकत का , मुबारक ईद हो तुमको ।
नज़ारा हर तरफ महका ,मुबारक ईद हो तुमको ।

फले हर ख्वाब आंखों का ,नहीं हो आंख नम कोई ।
मिटे नफरत का अंधियारा ,मुबारक ईद हो तुमको।

नहीं कोई ख़िलाफ़त हो ,लबों पर मुस्कुराहट हो।
मिले उल्फ़त का नज़राना , मुबारक ईद हो तुमको ।

दुआ हो खैर मक़दम हो ,न दहशत रंजिशें कोई ।
नहीं हो भेद मज़हब का ,मुबारक ईद हो तुमको ।

गिले शिकवे मिटा कर हम, आ बांटें प्यार की ईदी ।
“मृदुल” छा जाए मोहकता , मुबारक ईद हो तुमको ।
मंजूषा श्रीवास्तव” मृदुल”

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016