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मानस प्रबोध आश्रम

मानस प्रबोध आश्रम, घोघरा तहसील सौंसर जिला छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश में हनुमान जयंती के अवसर पर संकट मोचन राम भक्त हनुमान जी के सामने मुझे अपनी हाजरी लगाने का सुअवसर मिला.विगत दिनों से यहां 1001 सुंदर काण्ड का पाठ चल रहा था.
यह आश्रम एक टीले पर बना हुआ है. एकांत और रमणीक स्थल है. यहां नर्मदेश्वर स्वंभूनाथ विराज वान हैं. कॉविड के कारण पिछले दो वर्षों से यहां नहीं आ पाया.
आश्रम सूना रहता है लोग आते हैं दर्शन करके चले जाते हैं. केवल आश्रम की देखरेख करने वाले 4/5 लोग ही रहते हैं.
यहां के ट्रस्टी लोगों की कृपा है, मेरे लिए वह रुकने की व्यवस्था कर देते हैं और सुविधाओं का ख्याल रखते हैं. मैं एक सप्ताह यहां रुक जाता हूं.यहां महा शिवरात्रि और सावन माह और ऋषि पंचमी पर विशेष कार्यक्रम होते हैं.सावन के माह में मेरी कोशिश रहती है कि कुछ दिन यहां गुजारूं . उन दिनों प्रकृति का सौंदर्य देखने लायक होता है मौसम भी सुहावना होता है.
इस समय तो गर्मी थी पर आगरा की अपेक्षा कुछ राहत थी. मेरे कमरे में कूलर की व्यवस्था आश्रम के प्रबंधन कर्ताओं द्वारा यद्यपि कर दी गई  पर मैं दिन में 2 से 5 बजे ही कूलर का प्रयोग करता था बाकी समय पंखे का ही प्रयोग करता था.रात्रि को भी कूलर की विशेष आवश्यकता महसूस नहीं होती थी.
बाहरी दुनियां से बिल्कुल अलग थलग. बस प्रभु चरणों में वास. मुझे यह स्थान बहुत अच्छा लगता है. आश्रम के सामने सड़क पर नीचे जाम नदी, राम घाट है चारों और हरियाली ही हरियाली ,छोटे पहाड़ों की चारों ओर एक श्रृंखला. सामने ही घोघरा जल प्रपात.प्रपात में पानी बरसात में आता है.
चारों और केवल प्रकृति और प्रकृति. दिन में लोग आश्रम में दर्शन करने आते हैं. रात्रि साढ़े सात बजे आरती होने के बाद निस्तब्धता का राज्य स्थापित हो जाता है. सात्विक भोजन,सात्विक रहन सहन और नंगे पैर.
आश्रम की स्थापना श्री नित्यानंद सरस्वती महाराज,  जो कि पन्ना जिला के रहने वाले थे, द्वारा की गई थी.आप संस्कृत,इंग्लिश और दर्शनशास्त्र से एम. ए. किए हुए थे और घूमते घूमते इस स्थान पर आ गए थे जो एक टेकड़ी थी. नित्य वह रामायण का पाठ किया करते थे. बांसुरी, तबला और हरमोनियम तीनों एक साथ बजाते थे. है न अद्भुत.
सबसे पहले उन्होंने यहां दक्षिण मुखी हनुमान जी की स्थापना की फिर नर्मदेश्वर स्वंभूनाथ की स्थापना की. माता अन्नपूर्णा देवी का मंदिर, यज्ञशाला भी यहां हैं जहां समय समय पर यज्ञ होते रहते हैं.
महाराज जी अपने अंतिम समय में नर्मदा किनारे टिमरावन, गाडरवारा जिला नरसिंहपुर मध्यप्रदेश चले गए और वहीं उनकी देह शांत हुई, वहां उनकी समाधि है.कभी मौका मिला तो वहां जाकर दर्शन करूंगा.
आज सुबह घूमते हुए महुए के पेड़ की जानकारी लेते हुए उसके नीचे से उसके कुछ फूल चुन लाया .सारा कमरा उसकी खुशबू से महक रहा है.
आश्रम से दो किलोमीटर दूर ही सोते हुए हनुमान जी का एक मंदिर है जो जाम सावंली वाले हनुमान जी के नाम से प्रसिद्ध है.
श्री राम जय राम जय जय राम.

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020