कविता

रे खग तेरा सुन्दर जीवन

रे खग तेरा सुन्दर है जीवन
वर्षा का माह का जैसा सावन
ना किसी से कलह ना द्वेष
ना ईष्या ना जलन का लेश

उन्मुक्त गगन का तूँ है राजा
ना किसी से कोई  तकाजा
ना धन संचय की कोई चिन्ता
ना ठगने की तेरी कोई मनसा

सूरज की किरणें संग जग जाता
दाना चुगने खेतों में है तूँ जाता
जब भूख मिट जाता लौट आता
बाल गोपाल के संग छुप जाता

वृक्ष की डाली तेरा है बसेरा
महलों के जैसा है तेरा डेरा
जहाँ ना कूलर पंखा है होता
प्रकृति की गोद में शाम को सोता

काश! मैं भी एक पंक्षी होता
स्वतंत्र जीवन का आनंद लेता
ना कोई दुश्मन ना कोई रोता
अपनी रूची से रीत सा होता

ना जीने मरने की कोई चिन्ता
भ्रष्ट लोगों से ना रिश्ता होता
लुट खसोट का जीवन ना होता
वसुधैव कुटुम्बकम का सुख होता

— उदय किशोर साह

उदय किशोर साह

पत्रकार, दैनिक भास्कर जयपुर बाँका मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार मो.-9546115088