गीतिका/ग़ज़ल

अब समाचार व्यापार हो गए

किसकी बातें सच्ची जानें

अब समाचार व्यापार हो गए
पैसा जब से हाथ से फिसला
दूर नाते रिश्तेदार हो गए
डिजिटल डिजिटल सुना है जबसे
अपने हाथ पैर बेकार हो गए
रुपया पैसा बैंक तिजोरी
आज जीने के आधार हो गए
प्रेम अहिंसा सत्य अपरिग्रह
बापू क्यों लाचार हो गए
सीधा सच्चा मुश्किल में अब
कपटी रुतबेदार हो गए
— मदन मोहन सक्सेना