गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नहीं बदलते हैं सारे ही ख्वाब हकीकत में ।
वही होते हैं पूरे जो होते हैं किस्मत में ।।
रंग लहू और पानी का होता है जुदा जुदा ।
अपनों को कभी भूल न जाना यारा शोहरत में।।
इक दिन धोखा खा ही जाते हैं वो दुनिया में ।
चालाकी होती है यारों जिनकी फितरत में ।।
इतिहास रहेगा सदियों तक उसका ही दुनिया में ।
नेकनामियां रखेगा जो अपनी अस्मत में ।।
ईमान सम्मान न खोना तुम कभी झंझावातों  में ।
बेशक जीना पड़ जाए तुम्हें यारा गुरबत में ।।
बेदाग निकल जाते हैं वो दुनिया के रास्ते से ।
बशर जो रहते हैं अच्छे यारों की सोहबत में ।।
 धन दौलत से भी प्यारी एक चीज बताता हूं ।
 मांग लेना तुम अच्छे दोस्त खुदा से बरकत में ।।
— अशोक दर्द