कविता

मैं युवा हूँ

मैं युवा हूँ
मैं भविष्य हूँ
अपने देश का
भावी नौजवान हूँ
मैं अक्सर सोचता हूँ
मैं कहाँ हूँ

मैं युवा हूँ
मैं शहरी हूँ
मैं ग्रामीण हूँ
मैं पढ़ा लिखा हूँ
पर मैं जद्दोजहद में हूँ
लगता है खंडहर में हूँ,

मैं ऊँची जाति से हूँ
विकट भेद -भाव में हूँ
नौकरियों में आरक्षण है
मेरा कहां संरक्षण है?
मैं युवा हूँ
मैं कुंठित हूँ
नीतियों से अचंभित हूँ

मैं बेरोजगार हूँ
मैं एक सवाल हूँ
जवाब की तलाश में हूँ
उम्मीदों की आस में हूँ
पर कब तक, कहां तक?
मैं युवा हूँ,
मैं हताश हूँ
मैं निराश हूँ
मैं इस देश का भावी नौजवान हूँ

मैं युवा हूँ
मै भागता हूँ
हर दिन उम्मीदों से जागता हूँ
फिर कठोर निराशाओं से घिर जाता हूँ
मैं इस देश का नौजवान हूँ
मैं अकेला नहीं , बहुत भीड़ में हूँ
अपनी ब्यवस्था से परेशान हूँ

— ममता सिंह राठौर