गीतिका/ग़ज़ल

नजरबंद कर लो हमें

तेरी बांहों के घेरो में हम सुकून पाते
तुझे जिस्म से नहीं हम रूह से चाहते
नजरबंद हो इन मयकशी आंखों में
खुद को इस जमाने से महफ़ूज पाते।।
तेरी हर एक मुस्कान पर दिल लुटा बैठे
तेरी एक मुस्कान के लिए सितारे बिछाते।।
मेरी  बिखरी जुल्फें जब-जब तुम  संवारे हो
 बिखरी जुल्फों संग हम तुझसे लिपट जाते।।
मोहब्बत ए राह  में बहके-बहके नजर आए
बहके ना , हम तुम ये खता हम नहीं चाहते।।
वीणा के नाजुक  दिल को कभी न तोडना तुम
मेरी हर एक महकती सांसों में सिर्फ तुम्हीं समाते।।
— वीणा आडवाणी तन्वी