गीतिका/ग़ज़ल

मेरी ओर रूख न करो

मेरे जज़्बातों से तुम यूं अब खेलो नहीं
तोड़ा है तुमने  मेरे तुकड़ों को अब छेड़ो नहीं।।
टूटे टुकड़ो को जोड़ना जब-जब मैं फिर चाहती
घात आघात कर फिर से हमें यूं तुम छोड़ो नहीं।।
मेरे बहते आंसूओं को लिख हमने सजाया
मेरे सूखे दर्द ए आंसूओं कि लड़ी को मोड़ो नहीं।।
कातिल हो तुम मेरे लबों की हर मुस्कानों के
खुशी के कातिल मेरे तुम दर्द  हममे ओर जोड़ो नहीं।।
चाहती थी इतना ही कि तुम ही मेरे रहनुमा हो
वफा न निभाए तुम , तड़प अब मेरीओर रुख मोड़ो नहीं।।
क्यों यादों में आकर वीणा को तुम दर्द दे जाते हो
यूं यादों में आकर तुम मेरे हौंसलों को फिर तोड़ो नहीं।।
— वीना आडवाणी तन्वी

वीना आडवाणी तन्वी

गृहिणी साझा पुस्तक..Parents our life Memory लाकडाऊन के सकारात्मक प्रभाव दर्द-ए शायरा अवार्ड महफिल के सितारे त्रिवेणी काव्य शायरा अवार्ड प्रादेशिक समाचार पत्र 2020 का व्दितीय अवार्ड सर्वश्रेष्ठ रचनाकार अवार्ड भारतीय अखिल साहित्यिक हिन्दी संस्था मे हो रही प्रतियोगिता मे लगातार सात बार प्रथम स्थान प्राप्त।। आदि कई उपलबधियों से सम्मानित