कविता

बदलता परिवेश

 

रोज रखता था चिड़िया के लिए पानी

कुछ दिन से आती है चोंच डालती है

चोंच डाल बिना पानी पिए उड़ जाती है

कई दिन हो गए आती रोज है

पर बिन पानी पिए लौट जाती है

समझ नहीं आया ऐसा क्यों करती है

फिर ख्याल आया

कहीं ऐसा तो नहीं

पहले मैं आर ओ का पानी रखता था

वह आकर रोज पी जाती थी

अब मैं नल का पानी रखता हूं

आज जब रखा आर ओ का पानी

तो फटाफट पी गई और उसमें डुबकी भी लगा गई