गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

तन्हाई की पीर लिखूँगा ।
इन नैनौं का नीर लिखूँगा।

जिसने दिया वियोग क्रौंच को,
वही व्याध का तीर लिखूँगा ।

घाव पीठ पर देने वालों !
तुमको कैसे वीर लिखूँगा ।

उर में हैं झंझा भावों का ,
चेहरे को गंभीर लिखूँगा ।

मैं भी हूँ उनका अनुगामी ,
तूलसी ,सूर, कबीर लिखूँगा ।

हर सीता माँ रहे सुरक्षित ,
रेख नही प्राचीर लिखूँगा ।

चलों ‘गंजरहा’ कलम उठाओ,
मैं अपनी तकदीर लिखूँगा ।

—————- © डॉ. दिवाकर ‘गंजरहा’