लघुकथा

मार्गदर्शक

“अंतरराष्ट्रीय खेल समारोह में पदक जीतकर आप लोगों ने देश को गर्व करने का मौका दिया.” प्रधानमंत्री ने सभी पदकवीरों से मिलने के अवसर पर कहा.

रोहन भी बाधा दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली आया था. समारोह के बाद आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित एक कला मेले में गया.

“कितना प्यारा लग रहा है यह बच्चा तिरंगे झंडे के साथ!” उसने अपने आप से कहा – “लेकिन झंडा तो उसने उल्टा पकड़ा हुआ है! बुरी बात!” वहीं खड़ा-खड़ा वह सोच रहा था.
“झंडा सीधा पकड़िए, झंडे का सम्मान देश का सम्मान है.” नीचे लिखा भी था.

“यही तो कहा था बाधा दौड़ के कोच ने! मैं अपने पूरे जोशोखरोश से तुम्हें पदक जीतने तैयार कर रहा हूं. जब तुम पदक जीतोगे तो अपने तिरंगे झंडे के साथ तुम्हारी फोटो खिंचेगी. मगर ध्यान रहे झंडा सीधा पकड़ना, उल्टा नहीं. झंडा उल्टा पकड़ना बुरी बात!”
झंडे के साथ फोटो खिंचवाते समय मैंने यह ध्यान रखा भी था.

“बाधा दौड़ है, बाधाएं तो आएंगी ही! इस गिलहरी को देखो! दो खंभों के बीच नीचे बिल्ली बैठी है. नीचे से गई, तो बिल्ली चट कर जाएगी. इसलिए छलांग लगाते हुए वह एक खंभे से दूसरे खंभे तक जा रही है.” गुरुजी ने छोटा-सा वीडियो दिखाते हुए कहा था. “समझदारी से बाधा पार करना अच्छी बात.”

एक और छोटा-सा वीडियो दिखाते हुए गुरुजी ने कहा था- “देखो, वॉकिंग ट्रैक पर कितना बड़ा पेड़ गिरा हुआ है! अनेक लोग वहीं से वापिस हो लेते हैं. इस लड़की को देखो, कितनी होशियारी से निडर होकर किनारे से रास्ता बनाकर निकलकर जा रही है. होशियारी से निडर होकर बाधा पार करना अच्छी बात.”

गुरुजी की अच्छी बात, बुरी बात ने ही मुझे पदकवीर बनकर खुद को और देश को गर्व करने का मौका दिया.

“उसे लग रहा था कि गुरुजी अब भी मेरे मार्गदर्शक बनकर कभी मेरे आगे, कभी पीछे और कभी मेरा हाथ पकड़कर चल रहे हैं.” उसने पीछे मुड़कर देखा और अगला चित्र देखने लग गया.

*लीला तिवानी
लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “मार्गदर्शक

  1. गुरु के मार्गदर्शन को भलीभांति हृदयंगम करके शिष्य सफलता प्राप्त कर सकता है, यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय खेल जैसे अंतरराष्ट्रीय समारोहों में स्वर्ण पदक तक जीत सकता है. अन्य अनेक महापुरुषों की तरह श्री कृष्ण ने भी सच्चे मार्गदर्शक बनकर सारी दुनिया का मार्गदर्शन किया. उनके जन्मदिन को हम श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं. सबको श्री कृष्ण जन्माष्टमी की कोटिशः बधाइयां और शुभकामनाएं.

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