कविता

श्राद्ध वो, जो श्रद्धा से किया जाय

श्राद्ध वो, जो श्रद्धा से किया जाय,
किया अगर महज दिखावे के लिए,
तो श्राद्ध वह दिखावा ही रह जाय,
श्राद्ध वो, जो श्रद्धा से किया जाय.

श्राद्ध पितरों के लिए किया जाता है,
उनकी अनुकृति हैं हम याद दिलाता है,
उनकी याद को अमर किया जाय
श्राद्ध वो, जो श्रद्धा से किया जाय.

बाद मरने के कुछ किया तो क्या किया?
क्या जीते जी उनका सम्मान किया?
उनका सम्मान आशीर्वाद बन जाय,
श्राद्ध वो, जो श्रद्धा से किया जाय.

हर पल हर वस्तु में छाया-छाप है उनकी,
हर पल हर याद में उपस्थिति है उनकी,
उनकी मधुर यादों को और मधुर बनाया जाय,
श्राद्ध वो, जो श्रद्धा से किया जाय.

आंगन-औसारे गूंजती प्रतिध्वनि उनकी,
मिले संस्कारों में झलक मिलती है उनकी,
श्रद्धा से अर्पण करें, तर्पण करें मन लाय,
श्राद्ध वो, जो श्रद्धा से किया जाय.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244