कविता

हिन्दी हमारी शान

हिन्दी भाषा है बड़ी महान
राष्ट्र का बढ़ता इससे शान
जन-जन करें जिसका गुणगान
हिन्दी हमारा अभिमान।
यही है हमारा धर्म -ईमान
चाहे कोई भी हो प्रांत
हिन्दी है सभी का प्राण।
चाहे किसी भी धर्म को मानने वाले
सभी है हिन्दी को जानने वाले
हिन्दी की नहीं कोई मिसाल
हिन्दी भाषा है बड़ी बेमिसाल।
सदियों से अनवरत बहती जिसकी धार
कवियों विद्वानों की है जो पहचान
हिन्दी भाषा है बड़ी महान।
अपने आंचल में हर भाषा को समेटा
साहित्य को समृद्ध बनाया
हमारी संस्कृति को जो सींचा
हिन्दी है ऐसी अमृत धार
हिन्दी को हमारा कोटि -कोटि प्रणाम!
— विभा कुमारी “नीरजा”

*विभा कुमारी 'नीरजा'

शिक्षा-हिन्दी में एम ए रुचि-पेन्टिग एवम् पाक-कला वतर्मान निवास-#४७६सेक्टर १५a नोएडा U.P