कविता

मित्रता हमें निभाना है

मानव जीवन मेंं मित्रता का
अपना ही महत्व है,
मित्रता का अहम संदेश भी है।
मित्र हैं तो मित्रता का मूल्य समझिए
मित्रता की है तो मित्रता का आधार स्तंभ बनिए।
औपचारिक मित्र और मित्रता का
आवरण मत ओढ़िए,
मित्रता निभा सकते हैं तो ही मित्र बनिए
वरना फासले से रहिए।
मित्र हैं तो मित्रता निभाना सीखिये
मित्रता की आड़ मेंं षडयंत्र न रचिए।
मित्रता का रिश्ता हमारा आपका
खून के रिश्तों से भी बड़ा होता है,
मित्रता के रिश्तों को
जान देकर भी निभाना होता है,
तब जाकर मित्रता का सम्मान होता है।
मानवीय मूल्यों की माला का
कथित आवरण उतार दीजिए,
मित्र बन मित्रता की आड़ मेंं
छूरा घोंपने का प्रयास न कीजिए।
मानवीय मूल्यों का प्रतिमान बने न बने
पर मित्रता का स्वाभिमान बनाए रखिये।
माना की कुछ गलतफहमियां भी
मित्रता की राह मेंं दीवार बनने को
कभी आतुर हो जायें कभी,
उस दीवार को मजबूत करने के बजाय
उसे कमजोर कर गिराने का प्रयास करिए,
मित्र और मित्रता का नव प्रतिमान गढ़िए।

*सुधीर श्रीवास्तव
शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921