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  • हर आदमी

    हर आदमी

    हो गया क्‍यों अजनबी हर आदमी. सो गया क्‍यों मजहबी हर आदमी. वह पढ़ा है वह गुना है देश में, नहीं’ बना क्यों मकतबी हर आदमी. खूब धन दौलत कमा के बावला, बन गया क्‍यों मतलबी...






  • मनुष्य

    मनुष्य

    पदांत- है समांत- आन ज्ञान में सम्मान्य है, वागीश्वरी वरदान है. ज्ञान में सब प्राणियों में मनुष्य ही प्रधान है. विद्वान् है, गुणवान् है, महान् है कला में वह, प्राणिजगत् में मनुष्य ही इस धरा की...