कविता

चेहरों से चेहरे

चेहरों से चेहरे आज उतरने लगे, हम चुप क्या हुये गूंगे बकने लगे । लोगों की सोच आजकल उनकी, अपनी आंखो से ही बयां होती है। क्या जानो तुम की तन में पर्दा, नारी की आंखों में हया होती है। हमारा चुप रहना लाजिमी था, मगर उन्हें लगा हम उनसे डरने लगे । कौन समझाये […]

कविता

झांकियां 

ये गगनचुंबी इमारते, इमारतों की ये खिडकियां। लगती है जैसे उड रही है, बादल के दामन में तितलियाँ। ये खामोशियों के साये, सायों की ये झलकियां। मानो उनींदी सी नींदो को भी, आने लगी हैं झपकियां। ये ख्वाहिशों की रंगीन झांकियां,  झांकियों की यें रंगीनिया। लगता है जैसे आंखे चुरा रही हैं, मदमस्त सी ये […]

कविता

मै तेरे दिल की सुलगती आग

ना मैं तेरे फसाने का किस्सा ना तू मेरे हकीकत की कहानी मै तेरे दिल की सुलगती आग तू मेरी आंख से बहता पानी किनारे पे तन्हा बैठा बुढ़ापा लहरों संग हंसती खेलती जवानी मैं बर्फीली हवाओ सी सर्द सर्द तू आइने में जमी सी गर्द गर्द मेरे रग रग से छलकता ईमान तेरी नस […]

कविता

कविता

कितना कुछ कह ना पाई वो कितना कुछ छुपाये है औरत ही तो है ना साहब हर रिश्ता दिल से निभाये है। माँ बनकर ममता में ढल गई जैसा चाहा वो वैसे पल गई फिर बिटिया बन क्यूँ खल गई समाज ये कैसी रीत चलाये है। सजा काटती हैं जंजीरों में घर की सुख शान्ति […]

कविता

कविता

मन कागज की नाव है साथी, और ये तन माटी का ढेला है। दो दिन  हँसना दो दिन रोना, जिंदगी चार दिनों का मेला है। सुख दुख दोनों हैं आते जाते, ये जीवन बीते बस हँसते गाते। ये तन है कच्ची माटी का पुतला, मन  काला और  तन है उजला। मन की भक्ति है सच्ची […]

कविता

ख्वाब और ख्वाहिश

ख्वाबों ने जिंदा रखा, ख्वाहिशों ने मारा है जो टूट गया पलकों से वो किस्मत का सितारा है गैरों के ताल पे थिरकता अदाओं पे बनता बिखरता लुट गया गैरों की ख्वाहिश में कैसे कहें कि तू हमारा है नींदों की डोली में विदा हुई मेरे कुंवारे सपनों की लाश है अब तू मिल भी […]

कविता

कविता

पेड़ों की झुरमुटों से सूरज झांकता है, मानोअपने होने का निशान ताकता है। चारो तरफ बस बेचारगी समाई है, जाने किसने चमक वतन की चुराई है। कहने को तो हर गली मोहल्ला अपना है, पर आज इसे देख पाना भी एक सपना है। जाने कहाँ गुमशुदा आज पहचान हो गई,  शहर मेरा आज वजूद अपना […]

गीतिका/ग़ज़ल

सफेदपोश 

सफेदपोश जिस्मों के काले साये है, तोड़ के दिल संगदिल हँसते आये है। कौन कहे किस से कहे कौन सुनेगा, रिश्तों के ताने बाने अब कौन बुनेगा। बेहयायी का खेल खेलने वाले भला, कब और भला किस से शरमाये है। जाने दो जो जाना चाहे इस दिल से, जाने वाले कब किसी के रोके रुक […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिस्म

जिस्मों से निकलकर रूह छटपटाती है, जुगनुओं वाली मोहब्बत दिल जलाती है। रोमियो जूलियट लैला मजनूं शीरी फरहाद, हुए हैं सब इसी मोहब्बत के हाथों बर्बाद। ख्वाब गाह में ख्वाब आग उगलते है, हम ही जलाते है और हम ही जलते हैं। ख्वाहिशों वाली रात झिलमिलाती है, जब चाँदनी मेरे बदन को झुलसाती है। कोयल […]

कविता

भैया दूज और भाई

माँ से मेरा मायका है, पापा से है  परिवार। भाभी मेरी देहरी जैसी, भैया मायके का द्वार। रहे सलामत भतीजा मेरा, खुशियों से चहके मेरे भैया भाभी सपरिवार। भैया दूज का दिन सुहाना, भैया मेरे तुम ना भुलाना। रहू कहीं भी कैसे भी रहूं, भैया दूज को तुम आ जाना। हल्दी अक्षत कुमकुम टीका, भाल […]