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  • जीवन के वो चार दिना

    जीवन के वो चार दिना

    जीवन के वो चार दिना बीत गये जो प्यार बिना नफरत की आग जलती थी ख्वाहिशें भी खूब मचलती थी सपने जागते रहते थे सारी रैन जैसे उनींदी नींदों के बिना अपने भी पराये से लगते...

  • नग्मा

    नग्मा

    ये जो नग्मा दिल मेरा  गुनगुना रहा है किसी मीत का गाया हुआ सा लगता है सबकुछ खोकर आये हैं बेदर्द जमाने में फिर भी दिल कुछ पाया हुआ सा लगता है जिस्म ओ जां अपनी...

  • गंगा तट

    गंगा तट

    पाप किया ना पुन्य कमाया ना जाने क्या गंगा में धो आया कि गंगा हो गई मैली कि गंगा हो गई मैली  कि गंगा हो गई मैली मन का मैल ना धोकर आया तन रगड़ रगड...

  • दानव दहेज का

    दानव दहेज का

    रोती बिलखती बोली बेटी अपने बाबा से अँगनाई मे दहेज के दम पर दूल्हा ना खरीदो बाबा मेरी सगाई में आज तेरे चंचल इठलाती खिलखिलाती मस्त पवन हूँ कल पत्थर की रोती सिसकती दीवार बना दी...

  • मेरा आइना

    मेरा आइना

    मेरा आइना मुझसे अब मेरी पहचान मांगता है शायद मुझसे ज्यादा आइना मुझे पहचानता है बालों की खोती कालिख उभरती सफेद चमक आँखों के तले स्याह घेरे लफ्जों की बुझती चहक वो शायद इसकी वजह मुझसे...



  • तन्हाई

    तन्हाई

    तन्हा रात के  सीने पे तन्हा चाँद टहलता है जैसे आसमां आगोश में जमीं की आकर पिघलता है विरहा मन कहां किसी भी बात से कभी बहलता है दिल ही तो है आँसू पीकर भी और...

  • सपनों के जख्म

    सपनों के जख्म

    कहाँ तुम सा कोई होता है कहाँ हम सा कोई मिलता है उजड़ जाते है कई रस्मों रिवाजों के सुनहरे से बाग तब जाके मोहब्बत का एक खूबसूरत सा गुल खिलता है नींदे उतर जाती हैं...