गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अपनी बर्बादी के मंज़र नही देखे जाते, आंख में ठहरे समंदर नही देखे जाते गम से कुम्हलाए हुए चेहरों को देखूं कैसे, जाने क्या बात है? क्यों कर ,नही देखे जाते। जाफ़रानी सी महक आती थी जिनसे पहले, उनके बदले हुए तेवर नहीं देखे जाते। हाथ में जो लिए गुलदान फिरा करते थे, अब उन्ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अदावत बेसबब  मत कीजिये  अच्छा  नही लगता, ये नफरत बेसबब मत किजिये  अच्छा नही लगता। चलो  मंजूर   कीं  ये  बेसबब  की  नफ़रतें  लेकिन, मुहब्बत बेसबब मत  कीजिये  अच्छा  नही लगता। मेरी  पलकों  के  अंगारे  तेरे  दामन  न  झुलसा  दें, शरारत बेसबब मत  कीजिये  अच्छा  नही  लगता। सलाखें   तोड़   दीं   तो   ये   रिहाई  मार   डालेगी, जमानत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इश्क़ हमारा तुमको भी जब हद से पागल कर देगा, बिन सावन जो बरसेगा फिर ऐसा बादल कर देगा। लहज़े में खुशबू है उसके जैसे फूल मोंगरे का, सोहबत में रह जाऊं तो मुझको भी संदल कर देगा। आठ पहर मैं याद में उसकी महकी महकी फिरती हूं, छूकर मुझको अधरों से वो इत्र की […]

गीत/नवगीत

दर्द को शब्द में ढालकर आई हूं

दर्द को  शब्द  में ढालकर  आई हूं, बैठकर रोना  मुझको  गवारा नही। पीर के  मेघ  पलकों में  छाए मगर, अश्रुमोती  न  किंचित  बहाउंगी मैं, दर्द का  गांव  हो, धूप  हो, छांव हो, गीत होंठो  से  अब  गुनगुनाउंगी मैं, हाले दिल समझना मुमकिन हो गर, तेरी ज़ानिब  करूँगी  इशारा  नही। दर्द को शब्द  में  ढाल  कर […]