गीतिका/ग़ज़ल

गजल

दुःख जिसके ज़माने के अदंर है वो ही तो भोले शंकर है आये कैसे बहार उसमें जिसकी ये ज़मीं ही बंजर है देख ले बिछड़कर नहीं मरा हूं मैं अब ये हालात कितने बेहतर है। थोड़े में ही भर ही आते हैं। मेरे आंसू ही अब समंदर है

कविता

कविता

दुखो के बीच जीने की चाह पैदा कर रहा हूं मैं खुद को ऐसा बना रहा हूं कि मुझे जिंदगी जीने में कोई तकलीफ़ न हो और वो भी दुःखी न हो जिनका मुझसे कोई रिश्ता हो क्योंकि अपनों को दुःख देना बुरी बात है और ऐसी बातों को होने से रोया जाएं तो अच्छा […]

कविता

काविता

अपनी बारी का इंतजार था मगर वो बारी आई नहीं उसका इंतजार आज तक है मैं खुद को कैसे हारा मानूं क्योंकि मुझे अपने हुनर दिखाने मौका ही नहीं मिला बिना खेले तो कोई बाजी नहीं हारी जाती जीत गए तुम कैसे मैं तो अभी बाकी हूं इक पल में पारिणाम बदल सकता हूं जो […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

सफर थोड़ा है अब आराम चाहता है। अब मुसाफिर अपना धाम चाहता है। कभी करो और भी मेहनत और भी तुम अभी इसे क्या तू भी नाम चाहता है। आगज शानदार गुजरा था वै सा ही वो अपना मुकाम का अंजाम चाहता है। कोई पुरानी शय नहीं मौजूद जिसमे अगर नया साल है तो नई […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

क्या सचमुच नया साल आया है मेरे दिल में आज फिर सवाल आया है हद बढ़ गया नखरा आधुनिक समय का चलने को वो इस बार नई चाल आया है भूखा था वो कल रात से गरीब मुझको तो सुबह उसका ख्याल आया है

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

आपका ग़म लेकर साल नया है आया भुले हुए यार की मुझको याद दिला गया जहां में क्या अब खुशी मनाऊं उदासी लेकर हंसी के दौर वो कितना मुझे रूला गया खताएं मेरी सारी है हूं मैं ही गुनाहगार उसका पास मेरे आकर के मुझको ये बता गया है मेरे यार मुझे जान से बढ़कर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

बदला नहीं अभी कुछ भी तो नया साल क्यो कहा‌। झूठ भी कहा जो तुम तो इतना कमाल क्यो कहा। चेहरा ने कर लिया बयां अब ने क्यो मुझसे अच्छा है मेरा ऐसा हाल क्यों कहा। सुनी तो उसमें ज़बाब खुद बा खुद है मौजूद बिना सुने तुमने उसको अजीब सवाल क्यो कहा मैने नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

सुनो हमसे वो बात करते है और जुबां वाले खामोश बैठे हैं बिछड़कर हम मरे नहीं उनसे यानी वो सचमुच में वो झूठे हैं जिनके दिल भरे हुए हैं नफरत से देखो तो वो हमको बुरा कहते हैं जिनको हम कभी भी नहीं भाये उनके जुबां पर भी मेरे शेर आते‌ है जहां का दौर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

जान बाकी है जहान बाकी है। अभाव में जीनों को किसान बाकी है। लग गई सारी उम्र चुकाने में उसको सिर पर अभी तक लगान बाकी है अभी इक दौर में ही आधा घर बिखर गया अभी और भी ये तूफान बाकी है अभी पूरे करने जो खाब सोचे हैं कुछ पाने को थोड़ी अरमान […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

रात दिन किसी के लिए जो रोते रहेंगे। कब तक यूं ही खुशियों को खोते रहेगे। दिल को उदास रखना भी अच्छा नहीं लगता। नये साल में भी क्या उदासियो को बोते रहेंगे। अगर न आ पाया कोई जगाने हमको। तो उम्रभर बेख्याली में ही सोते रहेंगे। अजनबी हो गया अब वो ंंन लौटेगा। लगाकर […]