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  • स्टीफन हाकिंग

    स्टीफन हाकिंग

    ब्रह्मांड भी सहसा रोया है आज तुम्हारे जाने के बाद पर मैंने तुमसे जाना ब्रह्मांड के अनसुलझे सवाल जानते रहे सदियों से बन जाता है मरने पर इंसान एक तारा इतना सा ज्ञान हमारा पर तुमने...





  • उपेछित संगम नई कविता

    उपेछित संगम नई कविता

    संगम की रेती रेत के ऊपर गंगा दौड़ती, यहाँ थकती गंगा अभी-अभी बीता महाकुम्भ सब कुछ पहले जैसा सुनसान बेसुध। टिमटिमाते तारें तले बहती, काली होती गंगा बूढी होती यमुना। महाकुम्भ गया नहीं हो हल्ला भुला...


  • हक

    हक

    आज हम आजादी के 70वें साल में सांस ले रहे हैं। 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वंतत्र हुआ और लोकतांत्रिक देश के रूप में पूरी दुनिया के सामने आया। गुलामी की बेड़ियों को काटने के लिए...