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  • प्राकृतिक वरदान 

    प्राकृतिक वरदान 

    सरस निर्मल ह्दय बिखेरती मुस्कान मानो चमकती दूध सी चांदनी रात, कूक नींद तोड़ती मंद हवा संग शुभ प्रभात, पुष्प सा हो उठती भवंरो सा गुनगान नभ में रंग बिखरेती नन्ही सी पंछी समान हदय कितना...

  • चुनाव चल रहा है

    चुनाव चल रहा है

    बिरयानी मुफ्त में बंट रही है, कही शराब कट रही है, शायरी अदांज बिक जाते है लोकतंत्र का मजाक उडा़ते कई दिख जाते है, जो अंदेशा लेकर मन में वो सच में बहुत बडा़ है लोकतंत्र...




  • कविता – बसन्त

    कविता – बसन्त

    मै बंसत की बेला हूं, पतझड़ सा कठोर बहती पवन हूं पलको पर बिखरा सपनो वाला मन हूं, दो आंसू वाले पीली सरसो का खेत हूं हरे भरे उपवन में जलता रेत हूं, गरीब कहानी हूं...



  • कविता

    कविता

    कविता ही लिखता हूं कभी नही थकता हूं, जिदंगी की कोई किताब नही वक्त की कोई हिसाब नही बस कलम कल्पना के साये में जी रही है बस ढेर सारी दर्द की आंसू पी रहे है,...