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  • व्यंग्य- डग्गामार यात्रा वृतांत

    व्यंग्य- डग्गामार यात्रा वृतांत

    काशी बोले वाराणसी कौन नही जानता है, पडो़सी जिला से लगा हूं। आना-जाना हमेशा लगा रहता है, कभी साहित्य के कार्य से कभी व्यापार के लिये समय देते थे। सरकारी बसो की किराये बेतहाशा बढ़ जाने से दुखी हो गया। एक...

  • ईमानदारी का बोझ

    ईमानदारी का बोझ

    सभी को ईमानदारी शब्द सुनकर मन को शांति मिल जाता है, मैं लोकल अखबार में ज्वाइन कर लिया, सोचा पढ़ाई के साथ कुछ खर्च निकल आयेगें। महात्मा गांधी के जयंती पर मुझे ऐसे में एक बहुत बडे़...

  • शायर बन गया

    शायर बन गया

    पहले नजर में उन्हे देखा शायर बन गया जी, आग लग मन मेरे हलचल मच गया जी, उनकी नजर में जादू है सबकुछ लूट गया जी, उनकी अदायें क्या खूब है दिल फिसल गया जी, ये...

  • जूते की बात

    जूते की बात

    जूते ले लो जोर से चिल्लाता बाजार में जा रहा था, अरे कोई भी ब्रांड चाहियें मुझे बताओ नेताओ, कवियों पर फेकने वाला सस्ता जूता भी है। आप का नाम बडे़ अखबार से वामपंथ के दफ्तर...

  • देश चलेगा

    देश चलेगा

    ना तलवार उठा ना सिर कटा, ना बहे लहू की धार धारा 370 हट गया भारत की जयकार, कश्मीर से कन्याकुमारी धरती अब हुआ हमारी आग लगी सुनकर भारत में रहने वाले गद्दारो की , वो...

  • कोख में हत्या

    कोख में हत्या

    सुनो पेट में बच्चा है बात पक्का है, कल डाक्टर के पास चलो मैं सेट कर लिया हूं बस कुछ पल में पता चल जायेगा घर पर किलकारी या बच्चा साफ हो जायेगा, चेक हुआ आखिर...

  • शिक्षा और संस्कार

    शिक्षा और संस्कार

    स्कूल के एडमिशन का प्रचार चल रहा था, एडमिशन ले लो 2 पर एक मुफ्त में मेरे यहां सबसे बढिया व्यवस्था जैसे की एसी,कूलर पंखे बाजार में कुछ धंटो में ऐसा सुनाई देता मानो जैसे शिक्षा...

  • सच और झूठ

    सच और झूठ

    मौत अभी बाकी है क्यो कि इतिहास लिखना है नये दौर का तस्वीर खीचना है, सच कहने की हिम्मत नही है आज कल झूठ ही सही है, सच को गाली मिलता है झूठ को ताली मिलता...

  • नया समाज

    नया समाज

    रात को आफिस से लौटकर वापस स्वदेश आ गया, समाचार चैनल खोलकर बैठ गया। चैनल पर समाचार कम साबुन, बिस्कुट और बनियान का प्रचार पर प्रचार आ रहा था। परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने मोबाइल में...