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  • कविता –

    कविता –

    नीर पथ पर बिखरा था खामोश लोग निकलने लगे कदम ना ठहराया किसी ने बस देखकर अंजान होने लगे, पथ पर अकेली वो दरिदों से लड़ रही है किसी के गंदे नजर से अंधी जनता देखकर...

  • कविता

    कविता

    कविता ही लिखता हूं कभी नही थकता हूं, जिदंगी की कोई किताब नही वक्त की कोई हिसाब नही बस कलम कल्पना के साये में जी रही है बस ढेर सारी दर्द की आंसू पी रहे है,...


  • कविता- चुनाव चल रहा है

    कविता- चुनाव चल रहा है

    चुनाव चल रहा है अच्छे वादे दिख रहे होगें लोग बिक रहे होगें, भाषण पिलाया जा रहा झूठे कसमे खाया जा रहा, धड़ियाली आंसू बहा रहे जनता को हितैषी बता रहे ये नजारा पांच साल पहले...

  • कविता

    कविता

    तेरे नफरत को कैसे सह सकते है दूरी तुमसे कैसे रख सकते है, तुम कहानी हो मेरी जो मेरी जिदंगानी हो मेरी जो मेरे सांसो में बसते है, तेरे नफरत को कैसे सह सकते है जब...

  • राजनीति बदल गया

    राजनीति बदल गया

    सुबह उठकर परसाई साहब के तस्वीर को धूलमुक्त किया, अचानक नजर तस्वीर पर गई कितने मासूमियत भरे निगाह मुस्कुरा रहे थे, एक बार लगा कि बस नजर की दोष होगी। आश्चर्य बिल्कुल न हुआ, कोई अंधविश्वासी...

  • कविता- चुनावी सपना

    कविता- चुनावी सपना

    वो युवा से खुद की तकदीर लिये खुले मंच पर चढ़कर बोले, जिता दो भईया हमको बदल देगें रूख हवा का वो हंसकर बोले! दिखाये हसीन सपनें खूब उनसे अच्छा मेरा सपना जो पूरा पक्का होगा,...