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  • कविता – बसन्त

    कविता – बसन्त

    मै बंसत की बेला हूं, पतझड़ सा कठोर बहती पवन हूं पलको पर बिखरा सपनो वाला मन हूं, दो आंसू वाले पीली सरसो का खेत हूं हरे भरे उपवन में जलता रेत हूं, गरीब कहानी हूं...



  • कविता

    कविता

    कविता ही लिखता हूं कभी नही थकता हूं, जिदंगी की कोई किताब नही वक्त की कोई हिसाब नही बस कलम कल्पना के साये में जी रही है बस ढेर सारी दर्द की आंसू पी रहे है,...


  • कविता- चुनाव चल रहा है

    कविता- चुनाव चल रहा है

    चुनाव चल रहा है अच्छे वादे दिख रहे होगें लोग बिक रहे होगें, भाषण पिलाया जा रहा झूठे कसमे खाया जा रहा, धड़ियाली आंसू बहा रहे जनता को हितैषी बता रहे ये नजारा पांच साल पहले...

  • कविता

    कविता

    तेरे नफरत को कैसे सह सकते है दूरी तुमसे कैसे रख सकते है, तुम कहानी हो मेरी जो मेरी जिदंगानी हो मेरी जो मेरे सांसो में बसते है, तेरे नफरत को कैसे सह सकते है जब...

  • राजनीति बदल गया

    राजनीति बदल गया

    सुबह उठकर परसाई साहब के तस्वीर को धूलमुक्त किया, अचानक नजर तस्वीर पर गई कितने मासूमियत भरे निगाह मुस्कुरा रहे थे, एक बार लगा कि बस नजर की दोष होगी। आश्चर्य बिल्कुल न हुआ, कोई अंधविश्वासी...