कविता

मेरे सपनों का भारत

मेरे सपनों का भारत कहां होगा लुटते अस्मिता नारी का देखा ज्वाला बहती चिंगारी का देखा, मानवता को गिरते देखा उजाले को घिरते देखा, मेरे सपनों का भारत कहां होगा कृषि प्रधान देश का नाम है कृषक को आत्महत्या करते देखा, बदनाम गिरगिट रंग बदलने में माहिर नेताओं को इसमें देखा, मेरे सपनों का भारत […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग- आम लोगों का गिरना

कुछ दिन पहले रात को बाइक से घर लौट रहा था, सड़क के गड्ढे में गिरकर सिर फूट गया। अब घर पर लोगों का तांता लग गया, बहुत खुश हुआ मेरा साहित्य उछल-उछल कर तांडव करने लगा। शाम को कुछ समाचार पत्र वाले आ गए वे मुझसे हालचाल पूछा उसके बाद कागज निकालकर समाचार बनाने की प्रक्रिया शुरू […]

कविता

कविता- पतझड़ और जिंदगी

पतझड़ में बहार ही बहार है चाय की मीठी चुस्कियां गर्म पकोड़ो का बयार है, ठंड की सर्द झोकों में उम्मीद की किरण जगती आसमा के झरोखों में, जिंदगी भी पतझड़ से हो गई टूटकर सपने बिखरे इरादे ना जाने कहां खो गई, उम्मीद पतझड़ के बाद बसंत का बयार है, बस उस पल का […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- सोशल मीडिया पर समाज सेवा

वो एक समाजसेवी थे, समाजसेवी के साथ पशु प्रेमी भी जुड़ा है, उनका समाजसेवा बड़े-बड़े बैनर पोस्टर और समाचार के हेडलाइंस पर होते थे। टीवी डिबेट वाले अक्सर उन्हें बैठाकर सामाजिक मुद्दे पर चर्चा करवाते हैं। दिल्ली के बड़े-बड़े पार्टी में उन्हें अक्सर देखा जा सकता, उनका अच्छे-अच्छे लोगों से पहुंच था, शहर में करोड़ों की प्रापर्टी दबाकर रखा है। उस […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग- विचारधारा की लड़ाई

नेताजी का चुनाव चल रहा था भाषणबाजी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा था, नेताजी अपने निर्वाचन क्षेत्र में जगह-जगह विपक्ष को कोस रहे थे। कुछ टीवी समाचार वालों ने सोचा क्यों नहीं अमेरिका की तरह यहां पर डायरेक्ट प्रत्याशीयो का डिबेट हो जाए तो कितना अच्छा रहता। एक बड़े मैदान में मंच लगा वहां पर तमाम […]

कविता

बसंत की आहट

खेत पर सरसों के फूल खिले फूल खिले फूल खिले बागों में बसंत की आहट आने लगे, हवा के झोंको संग भंवरा मुस्कुराने लगे, मधुर मधुर तान गुनगुनाने लगे एक प्रेमी का ह्रदय विचलित हो गया देख कवि मुस्कुराने लगे, हां लिखने को मिल गया मुझको कलम कागज को बताने लगे, देख प्रकृत की हो […]

कविता

रवीश कुमार की किताब

डेरा तो शहर है गांव ही घर है सच को सच की तरह लिखा, शहर को शहर की तरह लिखा गांव को धरोहर की तरह लिखा, मिट्टी से  खेत खलिहान लिखा जमीन से खुली आसमान लिखा, इश्क से नफरत की आग लिखा दर्पण जैसे किताब तक लिखा बेहिसाब बेबाक तक लिखा, कुछ भी हो साहब […]

हास्य व्यंग्य

प्याज प्याज प्याज

न्यूज चैनल पर प्याज बिक रहा है, टीवी एंकर कामेडी शो माफ करिये, प्याज की मार पर डिबेट चल रहा था। समस्त पार्टी के प्रवक्ता बैठकर अपनी बात को रख रहे थे, एंकर साहब बीच में सुर में सुर मिला रहे है, पक्ष- प्याज को बदनाम करने के लिये माफ करिये सरकार को बदनाम करने के विपक्ष […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- डग्गामार यात्रा वृतांत

काशी बोले वाराणसी कौन नही जानता है, पडो़सी जिला से लगा हूं। आना-जाना हमेशा लगा रहता है, कभी साहित्य के कार्य से कभी व्यापार के लिये समय देते थे। सरकारी बसो की किराये बेतहाशा बढ़ जाने से दुखी हो गया। एक मित्र ने सुझाव दिया ” कवि महोदय वाराणसी प्राइवेट बस से यात्रा करो सरकारी बसो से कम किराये पर मान […]

हास्य व्यंग्य

ईमानदारी का बोझ

सभी को ईमानदारी शब्द सुनकर मन को शांति मिल जाता है, मैं लोकल अखबार में ज्वाइन कर लिया, सोचा पढ़ाई के साथ कुछ खर्च निकल आयेगें। महात्मा गांधी के जयंती पर मुझे ऐसे में एक बहुत बडे़ ईमानदार से मुलाकात हुआ, जो शहर के नामी ईमानदार हुआ करते थे। शहर के तमाम छोटे-बडे़ नेता उनके नाम की […]