हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – नेहरू जी की आत्मा

गहरी निद्रा में सो रहा था, अचानक एक चमकदार किरण प्रकट होकर मुझे झकझोर ने लगा, सामने देखा सफेद लिबास में चाचा नेहरू मुस्कुरा रहे थे! मेरा शरीर डरकर ठंडा पड़ने लगा सांसें उखड़ने लगी फिर मन कड़ा करके पूछा”और चाचाजी इधर कैसे आना हुआ, चाचा नेहरू बोले”अरे शाम को आपने ही दिल से याद किया […]

राजनीति

उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव

उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव जिस तरीके से नजदीक आ रहा है, राष्ट्रीय दल से लेकर क्षेत्रीय दल अपने बिसात फैलाने में आगे आ रहे है!  सभी दल अभी से राजनीतिक समीकरण अपने अपने तरीके से साध रहे हैं,आम आदमी पार्टी की जिस तरीके से मीडिया एक महत्वपूर्ण विपक्ष के रूप में स्थान दे रही है जबकि […]

सामाजिक

व्यथा आम इंसान की

बड़े-बड़े महापुरुषों ने कहा है कि जब सपना देखना है तो बड़ी सपने देखो छोटे से सपने का ख्याल भी मत करो! फिलहाल एक सपने का वर्णन कर रहा हूं, पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद एक छोटी सी कंपनी में जॉब कर लिया, छोटी-छोटी खुशियों को बटोर कर जिंदगी का आनंद भी लिया जा […]

राजनीति

कहानी चेतन चौहान की

कोरोना के बारे में लिखना छोड़ दिया, क्यों छोड़ा मार्च, अप्रैल और मई की भयानक तस्वीरें एक गरीब, मजदूर और किसान परिवार के लिए सचमुच बहुत डरावना था। मीडिया वाले भी दिनभर भ्रामक खबर चलाकर जान सांसत में डाल दिया, सच में हालात बेहद गंभीर हो गया। कलम को बन्द करके जेब में रख लिया कोरोना के […]

पर्यावरण

पौधशाला

कुछ पौधे की खरीदारी करने के लिए एक नर्सरी में गया वहां पर लगभग 10 से 15 ग्राहकों की भीड़ थी, वहां पर लगभग 500 किस्म के फल फूल और लकड़ी के पौधे बिकने के लिए रखे गए थे। बातो बात में नर्सरी के मालिक रामकुमार ने बताया ग्रामीण क्षेत्र में नर्सरी होने के बावजूद […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग- कोरोना में नेता जी

वो युवा नेताजी कम समय में बड़ा नाम कर चुके थे, आज सुबह अचानक वो मेरे घर पर धमक पड़े। गरीब लेखक के घर काली चाय के सिवाय और क्या मिलता सो मीठी बातो से उनका भव्य स्वागत किया। नेताजी बहुत उदास थे, मेरे पूछने पर नेताजी ने बताया कि “कोरोना महामारी के चलते आजकल उनका मार्केट डाउन […]

हास्य व्यंग्य

आत्मनिर्भरता की गाथा

आज आत्मनिर्भर शब्द सुनकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो धरती पर स्वर्ग का रचना होने वाला है। भारतीय नेताओं के मुंह आत्मनिर्भर सुनकर आज मन बहुत प्रसन्न हो रहा है, राजनीति आत्मनिर्भरता शब्द में आत्मा का नामोनिशान नहीं है। निर्भरता तो पूर्वजों की एक अमानत और संस्कृति है। हमारे समाज के लोग हमेशा नजर उठाए […]

कविता

कविता- चिट्ठी का दौर

जब तुम चिठ्ठी लिखा करते थे सच में उलझन रहता था, खामोशियो में इंतजार चिठ्ठी की कई दिनों तक करता था, हर रोज डाक पर हो आते थे पूछ पता तेरे चिठ्ठी की एक ठंडी आहे भरता था, निगाह लगाये राहों पर कि कब डाकिया आयेगा देख डाकिये को अपने गली में मन उमंग भरता […]

कविता

फर्जी आँसू

हर बार की तरह अबकी बार भी लिखने को कोई शब्द नही है, माफ कर दो वो भूखे गर्भवती हाथनी मानवता मर गई है कोई लब्ज नही है, लिख रहे है, उन पशु प्रेमी के लिये जो फर्जी आँसू बहाते आज मानवता की दुहाई चलेगी मोमबत्ती जलेगी नकली आँसू बहेगी, अखबारों में बड़े लेख लिखे […]

लघुकथा

दो गज कफन

कोरोना महामारी के डर से हजारो किलोमीटर पैदल चलकर देवराम बीच सड़क पर थक कर बैठ गये, उसका दम टूटने लगा, पांव दुख रहा है,अब आगे जाने की जरा हिम्मत नहीं रह गई हैं। वो तड़पती आवाज में बोल उठे ” थोड़ा रुक के चलो, अब शरीर भी जिन्दा लाश बन गया है। साथ चलने वाले […]